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इतिहास की धरोहर में शोध का दीप- मेदिनीपुर आंचलिक इतिहास अनुसंधान केंद्र की वार्षिक साधना सभा

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। अखंड मेदिनीपुर की धरती पर इतिहास की असंख्य कथाएँ आज भी समय की परतों में छिपी हुई हैं। कथाएँ जो समृद्ध भी हैं और प्रेरणादायी भी। उन्हीं भूले-बिसरे इतिहास के स्वर्णाक्षरों को खोजकर प्रकाश में लाने के उद्देश्य से गठित मेदिनीपुर आंचलिक इतिहास अनुसंधान केंद्र सतत् रूप से कार्यरत है। इसी क्रम में पूर्व मेदिनीपुर के महिषादल स्थित एपेक्स एकेडमी में केंद्र की वार्षिक आम सभा गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।

सभा की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार पार्थसारथी दास ने की। इस अवसर पर आंचलिक इतिहास के संरक्षण, अनुसंधान और प्रकाशन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ।

इतिहास-अनुसंधान की इस साधना में संलग्न केंद्र के शोधकर्ता-सदस्यों ने अब तक पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम के आंचलिक इतिहास पर आधारित तीन महत्वपूर्ण ग्रंथ प्रकाशित किए हैं, जिन्हें पाठक समाज ने विशेष स्नेह और सम्मान प्रदान किया है। आगामी वर्ष में इस ऐतिहासिक यात्रा का चतुर्थ खंड प्रकाशित होने जा रहा है।

केंद्र की ओर से पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और झाड़ग्राम के उत्साही इतिहास-शोधकर्ताओं से आंचलिक विषयों पर अपने शोध-प्रबंध प्रस्तुत करने का आह्वान किया गया। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि श्रेष्ठ शोधकर्ता को संस्था की ओर से विशेष सम्मान प्रदान किया जाएगा।

सभा में स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी सतीश चंद्र सामंत के जन्म की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर उनकी प्रतिकृति पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

संस्था की वार्षिक रिपोर्ट का पाठन संपादक प्रोफेसर हरिपद माईति ने किया, जबकि ऑडिट रिपोर्ट स्वपन कुमार मंडल द्वारा प्रस्तुत की गई। रिपोर्टों पर सार्थक चर्चा में डॉ. मिहिर कुमार प्रधान, अतनु मित्र, हरेंद्रनाथ माईति, जयदेव मालाकार, डॉ. सुशील कुमार बर्मन तथा प्रोफेसर सनातन माइती सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार रखे।

इस अवसर पर एपेक्स एकेडमी के प्रिंसिपल एवं अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। सभा के अंत में आगामी तीन वर्षों के लिए नई समिति का पुनर्निर्वाचन किया गया, जिसमें मन्मथनाथ दास को अध्यक्ष, प्रोफेसर हरिपद माईति को संपादक तथा प्रोफेसर सुस्नात जाना को कोषाध्यक्ष चुना गया।

इस प्रकार, इतिहास की दीपशिखा को प्रज्वलित रखने का संकल्प लेकर मेदिनीपुर आंचलिक इतिहास अनुसंधान केंद्र की यह वार्षिक सभा स्मरणीय बन गई।

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