कोलकाता। सखी बहिनपा मैथलानी समूह की कोलकाता इकाई ने कोलकाता आउटराम घाट में लगे गंगासागर जाने वाले यात्रियों के निमित्त लगने वाले शिविर में अन्नदान के साथ साथ श्रमदान किया। सभी महिलाओं ने बड़े ही उत्साह के साथ शिविर में पहुंचकर भोजन सामग्री ना केवल पहुंचाया बल्कि भोजन बनने के बाद शिविर में पहुंचे तीर्थयात्रियों को भोजन करवाया।
साथ ही तीर्थयात्रियों के बीच कंबल वितरण भी किया गया। ज्ञातव्य हो कि संस्था इन सेवा कार्यों के साथ-साथ मिथिला संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन हेतु काम करती है। इसके अलावे सामूहिक विवाह, बाढ़ और जरूरतमंदों की शिक्षा हेतु भी यह संस्था कार्यरत है।
सखी बहिनपा मैथिलानी समूह देश-विदेश में पसरे हुए मैथिलानियों का एक सामाजिक संगठन है।यह संगठन मैथिली भाषा के माध्यम से मैथिलानियों को संगठित करने का कार्य करती है। चुकि किसी भी समाज का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब उस समाज के पुरुषों के साथ-साथ उसकी आधी आबादी यानी महिलाएं भी सशक्त हों एवं अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

इसी तथ्य को लक्ष्य कर सखीबहिनपा मिथिला क्षेत्र से संबंधित महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक एवं कौशल विकास द्वारा उनके आत्मविश्वास जगाने तथा आत्मनिर्भरता लाने में सहायता करती है। यह सक्रिय चालीस हजार से अधिक सिर्फ महिलाओं द्वारा संचालित एक संगठन है। जिसकी देश-विदेश में फैली करीब 170 इकाईयां हैं।
यह संगठन मिथिला की सभ्यता-संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के साथ-साथ मैथिलानियों को आधुनिक समाज में कदम से कदम मिला कर चलने का हुनर भी प्रदान करती है। इसके लिए संस्था द्वारा विभिन्न तरह की योजनाएं चलाई जाती है।
सखी बहिनपा द्वारा कौशल विकास योजना के तहत ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों ही तरह के निःशुल्क के अलावे सशुल्क मिथिला चित्रकला प्रशिक्षण, फाइन आर्ट प्रशिक्षण,सौंदर्य निखार प्रशिक्षण, सिलाई-कटाई प्रशिक्षण, कुशन निर्माण प्रशिक्षण, बेकरी प्रशिक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट प्रशिक्षण, स्पोकेन इंग्लिश प्रशिक्षण, साहित्यिक मैथिली भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता प्रशिक्षण, तिरहुता लिपि प्रशिक्षण, मेंहदी आर्ट प्रशिक्षण आदि जैसे कोर्स करवाए जाते हैं।
इसके अलावे संस्था अपने सामाजिक दायित्व योजना के तहत वर्ष में कई-कई बार करके विभिन्न इकाईयों द्वारा निःशुल्क चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर, हेल्थ चेकअप कैम्प आदि लगाए जाते हैं। कोरोना महामारी के समय भी बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाएं, एंबुलेंस की व्यवस्था इस संस्था द्वारा सहज ही उपलब्ध करवाई गई।
देश के किसी भी कोने में रक्त की आवश्यकता होने पर सिर्फ एक फोन कॉल पर स्थानीय इकाई द्वारा बल्ड उपलब्ध करवाया जाता है। मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के प्रकोप में पीड़ितों तक दवाएं, भोजन एवं आर्थिक सहायता प्रदान की गई। कैंसर एवं गंभीर बिमारियों के खर्च को पूरा करने में अक्षम लोगों को संस्था के सदस्य आपस में चंदा कर पूरा करते हैं।
दिल्ली के झुग्गी एवं मधुबनी के गरीबों की बस्ती में अगलग्गी से पीड़ितों को आवश्यक वस्तुएं एवं आर्थिक सहायता प्रदान की गई। बाढ़ के समय उन स्थानों तक भी जरूरत सामग्री पहुँचाई जाती है, जहाँ सरकारी व्यवस्था नहीं पहुँचती है।
संस्था के सदस्य पर्व-त्योहारों के मौकों के अलावे अपने जन्मदिन या किसी विशेष खुशी को अनाथालय, वृद्धाश्रम एवं जरूरतमंदों के बीच भोजन, वस्त्र, जरूरत की सामग्री आदि बांटकर या दानकर मनाते हैं। आर्थिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए शिक्षा सामग्री एवं उनकी फीस की व्यवस्था कर उन्हें मदद की जाती है। निर्धन बालिकाओं के विवाह का खर्च की व्यवस्था भी संस्था करती है।
संस्था अपने सभ्यता-संस्कृति विकास योजना के तहत मैथिली भाषा को शिक्षा, राजकाज एवं मीडिया में लाने के लिए सतत जन जागरूकता एवं सरकार पर दबाव डालने के लिए रैली, वर्कशॉप एवं धरना-प्रदर्शन का भी आयोजन करती है। इसी कड़ी में दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो बार, मधुबनी -दरभंगा समाहरणालय पर दो-दो बार धरना दिया गया।
प्रत्येक वर्ष गंगासागर मेला के दौरान श्रद्धालुओं के भोजन, चिकित्सा व्यवस्था में आर्थिक मदद एवं श्रमदान संस्था के कोलकाता इकाई की सखियों द्वारा की जाती है। श्रावण मेले के दौरान देवघर इकाई की सखियों द्वारा कांवड़ यात्री सेवा शिविर लगाया जाता है। इकाई की प्रभारी हिमाद्रि मिश्र के मार्गदर्शन में कार्यरत हैं।
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