मालदा | 27 अगस्त 2025 — पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सीवी आनंद बोस ने गौर बंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पवित्र चट्टोपाध्याय को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। यह निर्णय कर्तव्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते लिया गया।
प्रो. चट्टोपाध्याय ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उन्हें “राजनीतिक साजिश” के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
राज्यपाल का यह आदेश विश्वविद्यालय के महाविद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रोफेसर पर कानूनी खर्चों के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद आया है। राज्यपाल राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं।
राजभवन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कुलपति पर लगे आरोप “गंभीर प्रकृति” के हैं और ऐसे व्यक्ति का पद पर बने रहना विश्वविद्यालय की गरिमा के प्रतिकूल है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कुलपति ने एक अधिवक्ता से ₹3 लाख की अवैध मांग की थी, जो कि न्यायिक प्रक्रिया के लिए अनुचित है।
📌 मुख्य बिंदु
- कुलपति पर 3 लाख रुपये की अवैध मांग, कानूनी खर्चों के नाम पर आरोप
- राजभवन द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को VC पद पर बने रहना उचित नहीं
- कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर भी सवाल
- दीक्षांत समारोह रद्द करने के मामले में भी कुलपति की भूमिका पर उठे सवाल
- प्रो. चट्टोपाध्याय ने सभी आरोपों से इनकार किया है
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में कुलपति के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें दीक्षांत समारोह रद्द करने और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठाए गए थे। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2017 के बाद से कोई दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं हुआ है।
राज्यपाल के इस निर्णय को शिक्षा जगत में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
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