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एआई के दौर में राजभाषा अधिकारी की बदलती भूमिका

नई दिल्ली। भारत में राजभाषा का उद्देश्य केवल अनुवाद करना नहीं है, बल्कि प्रशासन को जनता की भाषा में जोड़ना है। लंबे समय तक राजभाषा अधिकारी की भूमिका को फाइलों में हिंदी टिप्पणी लिखने, अनुवाद करने और तिमाही रिपोर्ट बनाने तक सीमित समझा जाता रहा। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में यह भूमिका पूरी तरह बदल रही है।

1. अनुवादक से भाषा प्रबंधक तक :
पहले राजभाषा अधिकारी का सबसे बड़ा काम अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद था। आज Google Translate, Bhashini, और ChatGPT जैसे टूल सेकंडों में अनुवाद कर देते हैं।

इसका अर्थ यह नहीं कि अधिकारी की जरूरत खत्म हो गई, बल्कि उसकी भूमिका बदल गई है। अब उसे अनुवादक नहीं, बल्कि भाषा का संपादक, समीक्षक और गुणवत्ता नियंत्रक बनना होगा। एआई अक्सर शाब्दिक अनुवाद करता है, जिसमें सरकारी भाषा की गरिमा, विधिक शब्दावली और भाव नहीं होता। राजभाषा अधिकारी का काम है एआई द्वारा किए गए अनुवाद को परिमार्जित कर उसे राजभाषा अधिनियम के अनुरूप बनाए।

2. नई जिम्मेदारियाँ :
(क) एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियर के रूप में :
अब कार्यालय में सही हिंदी में पत्र, परिपत्र, प्रेस विज्ञप्ति तैयार करने के लिए एआई को सही निर्देश देना एक कला है। राजभाषा अधिकारी वह व्यक्ति होगा जो कर्मचारियों को सिखाएगा कि “बेहतर हिंदी आउटपुट के लिए एआई से कैसे पूछा जाए।”

(ख) तकनीक और भाषा के बीच सेतु :
Bhashini जैसे राष्ट्रीय भाषा प्रौद्योगिकी मिशन में राजभाषा अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है। वह अपने विभाग की शब्दावली, संक्षिप्ताक्षर और तकनीकी शब्दों का डेटाबेस बनाकर एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने में मदद कर सकता है।

(ग) हिंदी को सहज बनाने का दूत :
एआई ने हिंदी टाइपिंग का डर खत्म कर दिया है। अब वॉयस-टू-टेक्स्ट से कोई भी हिंदी में नोट लिख सकता है। राजभाषा अधिकारी का काम डराने वाला निरीक्षक नहीं, बल्कि प्रेरक बनना है। उसे कार्यशालाओं में यह बताना होगा कि एआई टूल्स का उपयोग करके हिंदी में काम करना अंग्रेजी से भी आसान है।

(घ) डिजिटल सामग्री का प्रबंधक :
आज वेबसाइट, सोशल मीडिया, चैटबॉट सब हिंदी में चाहिए। राजभाषा अधिकारी अब केवल फाइलों का अधिकारी नहीं, बल्कि विभाग की वेबसाइट, ट्विटर/ एक्स और जनता से जुड़ने वाले चैटबॉट की भाषा का संरक्षक है।

3. चुनौतियाँ :
एआई हिंदी को सरल तो बना रहा है, पर राजभाषा की एकरूपता को भी बिगाड़ रहा है। दूसरी और महत्वपूर्ण चुनौती यह कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से भाषा में अशुद्धता और मौलिक चिंतन की कमी आ सकती है। कई बार एआई गलत संदर्भ में गलत शब्द प्रयोग कर देता है।

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उदाहरण :-
वाक्यांश –
(i) Startup engagement- स्टार्टअप सगाई मंच
(ii) Demonetization- दानवीकरण
(iii) Steel Articles- इस्पात लेख

वाक्य :-
(i) Chief of the Army Ngo Dinh Diem replaced the king Bao Die.
दक्षिण वियतनाम के सशत्र बलों के प्रमुख ‘गैर सरकारी संगठन’ डीन्ह डिएम ने राजा बाओ डाइ को सत्ता से हटा दिया।

(ii) The politburo and The Central committee are the two arms of CPI.
पोलितब्यूरो और केंद्रीय समिति सीपीआई के दो हथियार हैं।

और सबसे बेहतरीन
(iii) Ladies changeover room
महिलाओं को बदलने का स्थान।

हालांकि अनुवाद में एआई प्रयोग के लाभ भी बहुत हैं :-
(i) एक अनुभवी और पेशेवर अनुवादक कई बार काफी महंगा पड़ सकता है। एआई अनुवाद यह काम निःशुल्क करता है।

(ii) एआई ट्रांसलेट काफी तेज है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
(iii) जहां एक अनुभवी अनुवादक दिन भर में करीब 2000 शब्दों यानी तीन-चार सौ शब्द प्रति घंटे का अनुवाद कर सकता है वहीं दूसरी ओर एआई ट्रांसलेट कुछ ही सेकंड में इतने शब्दों का अनुवाद कर सकता है।

(iv) जिस फाइल में तमाम तरह की टेबल और चार्ट बने रहते थे, कंप्यूटर (एमएस ऑफिस) का ज्ञान न रखने वाले अनुवादको के लिए उस फ़ाइल का अनुवाद करना बड़ा मुश्किल कार्य हुआ करता था। क्योंकि हाथ से टेबल और चार्ट बनाना आसान नहीं है और कंप्यूटर से यह करना सबके बस की बात नहीं है। किंतु अब यह कार्य बेहद आसान हो गया है क्योंकि एआई अनुवाद फॉर्मेट से छेड़छाड़ नहीं करता है। अनुवाद में कुछ भी गलती हो जाए लेकिन फॉर्मेट वही रहता है। अब एआई अनुवाद से पूरी फाइल का एक साथ अनुवाद किया जाए तो भी उसका फॉर्मेट बिगड़ता नहीं है।

(v) सरकार के उन कार्यालयों में जहां अनुवादकों को एक दिन में 10-12 पेज तक का अनुवाद करना पड़ता है, वहाँ पर इतने पेज का अनुवाद हाथ से करना अत्यंत श्रमसाध्य था। बाद के पेज की राइटिंग गड़बड़ होने लगती थी और जिनकी राइटिंग खराब है, उनका अनुवाद पढ़ना टाइपिस्ट के लिए बहुत मुश्किल हो जाता था। एआई ज़्यादातर अनुवाद और टाइपिंग खुद ही कर देता है। अतः टाइपिंग का थोड़ा सा भी ज्ञान रखने वाला अनुवादक थोड़े बहुत सुधार के साथ टाइप किया हुआ अनुवाद प्रस्तुत कर सकता है। इससे संपादक और प्रूफ रीडर का कार्य काफी आसान हो जाता है।

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4. एआई की सीमाएं :-
(i) एआई अनुवाद सरल सीधा अनुवाद तो आसानी से कर लेता है लेकिन तकनीकी और क्लिष्ट भाषा का सटीक अनुवाद नहीं कर पाता है।

(ii) अनुवाद की गुणवत्ता भाषा पर निर्भर करती है। कौन सी भाषाएं इसमें शामिल हैं उनसे भी काफी फर्क पड़ता है। एआई का डेटाबेस मुख्य रूप से ऑनलाइन के आधार पर बनाया गया था। इसलिए खासकर इंग्लिश और स्पेनिश अनुवाद ज्यादा सही मिलते हैं जबकि अन्य भाषाओं का डेटाबेस कम तैयार है जिनमें ग्रामर की अक्सर गलतियां दिख जाती हैं।

(iii) इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है।

(iv) एआई ट्रांसलेशन गोपनीय नहीं रह पाता है। जिन कार्यालयों में गोपनीयता आवश्यक है, वहां इसकी सीमित उपयोगिता है।

(v) एआई ट्रांसलेट के साथ लिंग भेद का आरोप भी जुड़ा हुआ है। जैसे कि – यह सभी चिकित्सकों को पुरुष और नर्सों को महिला मानता है।

5. एआई तकनीक और राजभाषा अधिकारी की बदलती जिम्मेदारियां :-
राजभाषा अधिकारी को केवल अनुवादित सामग्री तैयार नहीं करनी होती, बल्कि यह भी देखना होता है कि कार्यालय में हिंदी का प्रयोग स्वाभाविक, प्रभावी और जनोपयोगी हो। इसके साथ-साथ उसे डिजिटल माध्यमों पर हिंदी सामग्री की गुणवत्ता, ईमेल, वेबसाइट, सोशल मीडिया और प्रशिक्षण सामग्री की भाषा पर भी ध्यान देना पड़ता है। अब उसकी भूमिका में तीन नए आयाम प्रमुख हो गए हैं :

(i) एआई-उपकरणों का विवेकपूर्ण उपयोग।
(ii) भाषा की शुद्धता बनाये रखना।
(iii) कर्मचारियों को हिंदी में काम करने के लिए प्रेरित करना।

6. एआई वरदान है या अभिशाप :- महान कवि रामधारी सिंह दिनकर ने विज्ञान के लिए कहा था कि विज्ञान दोधारी तलवार है। इसी तरह एआई का सही उपयोग समय और श्रम बचाता है। आवास का ढांचा यह खड़ा कर देता है, जिस पर सुसज्जित घर बनाना आसान हो जाता है। किन्तु यदि एआई को ही अंतिम सत्य मान लिया जाए तो यह अर्थ का अनर्थ भी कर सकता है।

कहने का अर्थ यह कि साधारण अनुवाद के लिए तो एआई ट्रांसलेट का सहारा लिया जा सकता है लेकिन जहां पर दो देशों के रिश्ते, राजनीतिक/ कूटनीतिक मामले या वित्तीय लेन-देन शामिल हो ऐसे मामलों में एआई अनुवाद कभी नहीं किया जाना चाहिए।

7. भविष्य की दिशा :-
भविष्य का राजभाषा अधिकारी एआई-विरोधी नहीं, बल्कि एआई-सहायक होगा। उसे एआई की मदद से गति बढ़ानी होगी, लेकिन साथ ही भाषा की आत्मीयता, संस्थागत मर्यादा और संवैधानिक उद्देश्य को बनाए रखना होगा। संक्षेप में, एआई के दौर में राजभाषा अधिकारी का काम कम नहीं हुआ है, बल्कि और अधिक सार्थक हो गया है। अब वह केवल शब्दों का अनुवादक नहीं, बल्कि भाषा-संस्कृति, प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल भारत के बीच सेतु बनाने वाला अधिकारी है ।

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निष्कर्ष : किसी भी मशीन की तरह एआई राजभाषा अधिकारी के कार्य को आसान बनाता है। किन्तु यह भावनाओं और संदर्भ का ख्याल किए बिना सिर्फ और सिर्फ शब्दों का अनुवाद करता है। यदि अधिकारी स्वयं ही एआई पर निर्भर हो गया तो भाषा की गुणवत्ता गिरेगी। इसीलिए एआई अनुवाद साधन है, साध्य नहीं। एआई अत्याधुनिक मशीन ही है और मशीन का मानव बनना अभी भी शेष है।
जय हिंद, जय हिंदी!

विनय सिंह बैस
सहायक निदेशक

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