Nitesh tejaswi

बिहार को विशेष राज्य दर्जा की मांग बयानबाजी तक रही सीमित!

पटना । बिहार की राजनीति में विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सियासत होती रही है। इसे लेकर कई दल राज्य का सबसे बड़े हितैषी साबित करने में भले जुटे रहे, लेकिन इसका लाभ राज्य को अब तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार के बिहार आगमन पर यह मुद्दा फिर से राज्य की सियासत में चर्चा में आ गया है। बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड के संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करते हुए आशा व्यक्त की थी कि प्रधानमंत्री अपने बिहार के दौरे पर इसकी घोषणा करेंगे। इसी तरह राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने भी विशेष राज्य का दर्जा की मांग की थी।

प्रधानमंत्री मंगलवार को बिहार विधानसभा भवन शताब्दी समारोह में शिरकत करने बिहार पहुंचे। उनके साथ मंच साझा करने वालों में जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव भी थे। दोनों नेताओं ने समारोह को संबोधित भी किया लेकिन दोनो में से किसी ने प्रधानमंत्री के सामने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग का उल्लेख नहीं किया। अब सवाल है कि क्या विशेष राज्य का दर्जा की मांग केवल जनता को बरगलाने तक के लिए ही सीमित रह गया है। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो सुबोध मेहता कहते हैं कि राजद का यह पुराना मुद्दा है। विभिन्न मंचों से इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है। शताब्दी समापन समारोह में इस मुद्दे को उठाना उचित नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा नहीं कि राजद ने इस मुद्दे को छोड़ दिया है।

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भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दिल में बिहार को लेकर अगाध प्रेम व श्रद्धा का भाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक बिहार को जितना लाभ पहुंचाया है वो गजब है। केंद्र ने बिहार में इंफ्रास्ट्रक्च र डेवलपमेंट करने में पूरी मदद की और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक तौर पर मजबूती प्रदान की, यह प्रशंसनीय है। निखिल ने कहा कि लोकतंत्र में सबको कुछ कहने का और मांग करने की छूट है। वैसे राजनीतिक दल अपनी राजनीति के हित में मुद्दे बनाते हैं लेकिन तथ्यपरक विश्लेषण भी होना चाहिए।

दावा करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली के लिए मोदी सरकार ने 16,130 करोड़ रुपये से बक्सर में 1300 मेगावाट का नए विद्युत संयंत्र को मंजूरी दी। बांका में 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से 4,000 मेगावाट बिजली कारखाना का निर्माण पूरे होने जा रहा है। मोदी सरकार बिजली उत्पादन में बिहार को आत्मनिर्भर कर रही हैं। डिजिटल बिहार अभियान के तहत प्रधानमंत्री ने 449 करोड़ रुपये दिए। बिहार में पेट्रोलियम-गैस के लिए 21,476 करोड़ रुपये दिए। इससे बरौनी रिफाइनरी का विस्तार और नया पेट्रोकेमिकल संयंत्र-गैस पाइप लाइनों का निर्माण, नये एलपीजी संयंत्र व घरेलू एलपीजी कनेक्शन में विस्तार हुआ। रक्सौल से नेपाल तक पेट्रोल-डीजल पाइप लाइन बिछ रही है। यह तो हाल में लिए गए कुछ निर्णयों की चर्चा है, पर 2014 के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए जो किया है उस पर पूरी किताब लिखी जा सकती है।

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