- खड़गपुर की रेजोवाना खातून की कहानी ने झकझोर दिया समाज
खड़गपुर, पश्चिम बंगाल | 1 सितंबर 2025 — खड़गपुर रेलवे स्टेशन के पास देवांगपुर वार्ड नंबर 5 की रहने वाली रेजोवाना खातून इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्हें एक दुर्लभ मानसिक बीमारी है, जिसके कारण वे बार-बार हिंसक हो जाती हैं और आसपास की चीज़ों को नुकसान पहुंचाती हैं — दुकानों के शीशे, घरों की खिड़कियाँ, बाइक, यहां तक कि अस्पताल के स्टाफ तक को निशाना बना चुकी हैं।
परिवार के लिए यह स्थिति इतनी असहनीय हो गई कि पिता मो. रियोवान दाफिज ने घर पर ताला लगाकर फरार होने का फैसला किया। भाई मो. रेजाउल भी बहन के डर से घर छोड़कर चला गया। फिलहाल रेजोवाना को श्रीरामपुर वॉल्स अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
📌 मुख्य तथ्य:
- रेजोवाना को पहले चांदमारी अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन वहां से भाग निकलीं।
- अस्पताल प्रशासन ने वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब से परिवार की जानकारी जुटाने में मदद मांगी।
- जब पिता को बेटी की तस्वीर दिखाई गई, तो वे फूट-फूटकर रो पड़े और बोले — “वह मेरी इकलौती बेटी है, लेकिन उसके कारण मेरा सब कुछ खत्म हो गया।”
रेजोवाना को पहले खड़गपुर चांदमारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां भी उसने डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट की और वहां से भाग निकली। फिलहाल उसे श्रीरामपुर वॉल्स अस्पताल में भर्ती किया गया है। हालांकि अस्पताल में भर्ती होने से पहले उसके परिवार के बारे में किसी को पता नहीं था।
इसलिए वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम) रेडियो से मदद मांगी गई। तब जाकर उसकी सभी करतूतों के बारे में पता चला है। हैम रेडियो के वेस्ट बंगाल सचिव अंबरिश नाग विश्वास ने यह जानकारी दी।
🧠 बीमारी की प्रकृति:
- डॉक्टरों के अनुसार, रेजोवाना को एक रेयर मानसिक बीमारी है जिसमें वह अचानक हिंसक हो जाती हैं।
- इलाज के लिए लंबे समय की मनोचिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है।
- स्थानीय पार्षद और अस्पताल प्रशासन ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष उपचार की अपील की है।
उन्होंने बताया कि वाल्स अस्पताल के असिस्टेंट सुपर बसुदेव जोरदार ने वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब से परिवार का पता लगाने का अनुरोध किया। क्लब की टीम जब पिता को चंद्रकोणा रोड स्टेशन पर खोज पाई, तब बेटी की तस्वीर देखकर वे फूट-फूटकर रो पड़े।
भावुक होकर उन्होंने कहा— “वह मेरी इकलौती बेटी है, लेकिन उसके कारण मेरा सब कुछ खत्म हो गया। अब मैं किसी तरह की क्षतिपूर्ति नहीं दे सकता। अगर मजबूर किया गया तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।”
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