तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। कठोर परिश्रम की सुनहरी चमक के बीच श्रीनगर की वादियों में गूंज उठा बंगाल का जयघोष। 69वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों के टेबल टेनिस महाकुंभ में पश्चिम बंगाल की युवा सेना ने विजय का सूर्य उगाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
जम्मू विश्वविद्यालय के जिम्नेज़ियम हॉल में जब रैकेट और गेंद की लयबद्ध संगति सुनाई दी, तब मानो हवा में भी उत्साह थिरक उठा।
बंगाल की यह विजयी टोली – औशिक घोष, प्रत्युष मंडल, राजदीप दे, संग्राम सरकार और प्रियांशु कर्मकार ने एकता और आत्मविश्वास की रंगोली बिखेरी। मार्गदर्शक कोच सुमित मुखर्जी और मैनेजर अभिजीत राणा उनके पीछे छाया बनकर खड़े रहे, जैसे दीपक के नीचे स्थिर ज्योति।

लड़कियों के वर्ग में भी बंगाल की बेटियों ने संघर्ष का अद्भुत अध्याय लिखा। यद्यपि फाइनल में तमिलनाडु से पराजय मिली, पर उनके प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि हार केवल अगली विजय का अभ्यास मात्र है।
देवलीना घोराई, दीपान्विता साहा, नंदिनी साहा, दिया बसु और दिशा बसु इन नामों ने साहस और सौंदर्य का संगम रचा। उनकी कोच श्रीपर्णा नंद और मैनेजर मनी शंकर चौधरी ने इस सफर को दिशा दी, जैसे नाव को थामे कोई मुखर पतवार।
पिछले वर्ष रजत और कांस्य की चमक थी, इस बार स्वर्ण की रोशनी ने उसे परिपूर्णता दी। यह उपलब्धि बताती है कि टेबल टेनिस की मेज अब बंगाल के स्कूलों में केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि सपनों की प्रयोगशाला बन चुकी है।
जम्मू-कश्मीर के युवा सेवा और खेल विभाग द्वारा आयोजित यह आयोजन 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मेला बना, जिसमें हर पक्षी अपने सुर में चहका, पर अंततः बंगाल का स्वर सबसे ऊँचा गूंजा।
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