वाराणसी। अपनी राशि के अनुसार करें शिव पूजा, दान एवं मंत्र जाप – शिव की आराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है और अंतःकरण में अदम्य साहस एवं दृढ़ता का संचार करती है। ज्योतिष शास्त्र के दृष्टिकोण से चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ अर्थात स्वयं भगवान शिव हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती जी का विवाह हुआ था। मान्यता यह भी है कि इसी दिन भगवान शिव ने साकार रूप धारण किया था। तभी से प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
भाद्रपद मासिक शिवरात्रि पर्व के विषय में शास्त्री ने बताया कि भाद्रपद मासिक शिवरात्रि वर्ष 2026 में 09 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 09 सितंबर, बुधवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 10 सितंबर, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। रात्रि में मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 09 सितंबर को प्राप्त हो रहा है, इसलिए भाद्रपद मासिक शिवरात्रि 09 सितंबर, बुधवार को ही मनाई जाएगी।
मासिक शिवरात्रि की रात्रि पूजा का शुभ समय :
09 सितंबर, बुधवार को रात 11:57 बजे से देर रात 12:46 बजे तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त :
सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।
मासिक शिवरात्रि व्रत का पारण 10 सितंबर, गुरुवार की सुबह किया जाएगा।
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का पूजन एवं व्रत करने से अविवाहित महिलाओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। जिन लड़कों के विवाह में विलंब हो रहा हो, वे भी इस दिन व्रत एवं पूजन करें, जिससे उनकी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होने की मान्यता है। मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से दंपत्तियों का जीवन सुखमय एवं आनंदमय होता है तथा जीवन में आने वाले विभिन्न प्रकार के संकट दूर होते हैं।
शिवरात्रि का व्रत मोक्षदायी माना गया है। भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। शिव पूजा सभी पापों का क्षय करने वाली मानी गई है। मासिक शिवरात्रि के दिन शिवपूजन, शिवपुराण, रुद्राभिषेक, शिव कथा, शिव स्तोत्रों एवं ‘ॐ नमः शिवाय’ का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होने की मान्यता है।
पूजन विधि : इस दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ जुटने लगती है। विधिपूर्वक व्रत रखते हुए भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, पुष्प, शुद्ध वस्त्र, बेलपत्र, धूप, दीप, नैवेद्य, चंदन का लेप, ऋतुफल, आक-धतूरे के पुष्प तथा चावल आदि से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पूरे दिन भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। प्रातः स्नान करने के बाद भस्म का तिलक लगाकर रुद्राक्ष की माला धारण करें। शिव की आराधना इच्छा-शक्ति को मजबूत करती है और अंतःकरण में अदम्य साहस एवं दृढ़ता का संचार करती है।
इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भगवान भोलेनाथ पर चढ़ाया गया प्रसाद न खाएं। यदि शिव की मूर्ति के पास शालिग्राम स्थापित हो, तो प्रसाद ग्रहण करने में कोई दोष नहीं माना जाता।
राशि अनुसार शिव पूजा : महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि, प्रतिदिन अथवा प्रत्येक सोमवार को राशि के अनुसार शिव पूजा करने से शिव भक्तों को उत्तम लाभ एवं संतोष की प्राप्ति होने की मान्यता है।
मेष राशि : मेष राशि के शिव भक्त जल में गुड़, गन्ने का रस अथवा शहद मिलाकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। अभिषेक के बाद लाल चंदन से शिवलिंग पर तिलक करें। लाल चंदन से यथासंभव बेलपत्र पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करें। साथ में लाल पुष्प भी चढ़ाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। 11 ब्राह्मणों को शिवपुराण दान करें।
वृष राशि : वृष राशि के शिव भक्त गाय के दूध एवं दही से भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके अलावा भगवान शिव को चावल, सफेद चंदन, सफेद आक, सफेद वस्त्र एवं चमेली के फूल अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। वेदपाठी 11 ब्राह्मणों को रुद्राक्ष की माला दान करें।
मिथुन राशि : मिथुन राशि के शिव भक्त भगवान शिव का गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, शमी पत्र के अलावा साबुत हरे मूंग, भांग, दूर्वा एवं कुश भी अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें एवं 11 शिव चालीसा शिव मंदिर में अर्पित करें।
कर्क राशि : कर्क राशि के शिव भक्त भगवान शिव का दूध, दही एवं देशी घी से अभिषेक करें। सफेद चंदन से तिलक लगाते हुए साबुत अक्षत, सफेद गुलाब के फूल एवं शंखपुष्पी अर्पित करें। शिवाष्टक के 11 पाठ करें तथा शिव भक्तों को सफेद वस्त्र दान करें।
सिंह राशि : सिंह राशि के शिव भक्त जल में गुड़, लाल चंदन एवं शहद मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। लाल पुष्प एवं लाल चंदन का तिलक भगवान शिव को अर्पित करें। गुड़ एवं चावल से बनी खीर शिव मंदिर में प्रसाद के रूप में वितरित करें। शिवमहिम्न स्तोत्र का पाठ करें तथा कमलगट्टे की 11 माला दान करें।
कन्या राशि : कन्या राशि के शिव भक्त गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। भगवान भोलेनाथ को पान, बेलपत्र, धतूरा, भांग एवं दूर्वा अर्पित करें। शिवपुराण की कथा का वाचन करें अथवा सुनें।
तुला राशि : तुला राशि के शिव भक्त चमेली के तेल, दही, इत्र, घी एवं दूध से भगवान शिव का अभिषेक करें। सफेद चंदन का तिलक लगाएं और सफेद वस्त्र दान करें। मिश्री एवं खीर का भोग भगवान शिव को लगाएं तथा शिव मंदिर में दान करें। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि के शिव भक्त जल में गुड़, लाल चंदन एवं शहद मिलाकर तथा पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें। केसर एवं लाल पुष्प भगवान शिव को अर्पित करें। लाल हलवे का भोग लगाएं एवं दान करें। भगवान शिव के 1000 नामों का स्मरण करें।
धनु राशि : धनु राशि के शिव भक्त दूध में केसर, हल्दी एवं शहद मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। केसर एवं पीले चंदन का तिलक लगाते हुए पीले गेंदे के फूलों की माला अर्पित करें। शिव मंदिर में पीले रंग के वस्त्र दान करें। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें।
मकर राशि : मकर राशि के शिव भक्त जल में दूध या गेहूं मिलाकर भगवान शिव को अर्पित करें। तिल के तेल एवं नीले पुष्प भगवान भोलेनाथ को अर्पित करें। शिव मंदिर में नीले वस्त्र दान करें तथा भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण करें।
कुंभ राशि : कुंभ राशि के शिव भक्त नारियल के पानी या तिल के तेल से रुद्राभिषेक करें। शमी वृक्ष के पुष्प भगवान शिव को अर्पित करें। शिवाष्टक का पाठ करें।
मीन राशि : मीन राशि के शिव भक्त केसर मिश्रित जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की पूजा पंचामृत, दही, दूध एवं पीले पुष्पों से करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करना भी शुभ रहेगा।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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