कोलकाता हिन्दी न्यूज | 07 सितम्बर 2026: फल को आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन अगर उसी फल को गलत तरीके से पकाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाए तो उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की एक कार्रवाई के बाद केले की गुणवत्ता और उन्हें पकाने के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
हुगली के तारकेश्वर के वैद्यपुर चौमाथा इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कई केला कारोबारियों के घरों और परिसरों में छापेमारी की।
अधिकारियों ने कारोबारियों से केले पकाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली और कुछ स्थानों पर इस्तेमाल किए जा रहे रसायनों की जांच की। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर ऐसे रसायन भी बरामद किए गए, जिनके इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने आपत्ति जताई है।
कुछ घंटों में पक रहे थे केले, रसायनों के इस्तेमाल का आरोप
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान एक ऐसी प्रक्रिया सामने आई जिसमें पानी के साथ रसायन मिलाकर कच्चे केले पकाने का आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण केले बहुत कम समय में पक जाते हैं और उनका रंग भी चमकीला पीला दिखाई देने लगता है।
अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य तौर पर प्राकृतिक रूप से केले पकने में अधिक समय लगता है। लेकिन कथित तौर पर रसायनों के इस्तेमाल से कुछ घंटों में ही केले को पकाने की कोशिश की जा रही थी।
देखने में ये केले पूरी तरह पके हुए और आकर्षक दिखाई दे सकते हैं, जिससे आम उपभोक्ता के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें किस तरीके से पकाया गया है।
किन रसायनों के इस्तेमाल पर है रोक?
खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों पर स्पष्ट नियम हैं। कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, अधिकारियों के अनुसार निर्धारित मानकों के तहत अनुमत पदार्थों का इस्तेमाल भी तय नियमों और मात्रा के अनुसार ही किया जा सकता है। नियमों का उल्लंघन कर किसी भी ऐसे रसायन का इस्तेमाल करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
तारकेश्वर में हुई कार्रवाई के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग यह भी जांच कर रहा है कि बरामद किए गए रसायनों का इस्तेमाल किस तरह और कितने समय से किया जा रहा था।
सिर्फ केले ही नहीं, खाद्य पदार्थों की जांच तेज
केले को लेकर हुई यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीमें अलग-अलग जिलों में होटल, रेस्तरां, मिठाई की दुकानों, बाजारों और खाद्य उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण कर रही हैं।
हाल के अभियानों में कई जगहों पर खराब और लंबे समय से रखे खाद्य पदार्थ, संदिग्ध कच्चा माल, फफूंद लगे खाद्य उत्पाद और खाद्य पदार्थों में अनधिकृत रंग या अन्य पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।
गड़ियाहाट बाजार में भी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मांस और मछली की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने लिए थे। कुछ दुकानों में बिना उचित तारीख और लेबल के रखे गए फ्रोजन मांस को लेकर भी कार्रवाई की गई थी।
उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की जरूरत
खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, केवल रंग या बाहरी चमक देखकर फल की गुणवत्ता का अंदाजा लगाना हमेशा सही नहीं होता। उपभोक्ताओं को फल खरीदते समय उसकी गंध, बनावट और सामान्य स्वरूप पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि, केवल केले का अधिक पीला या चमकीला दिखना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसे प्रतिबंधित रसायन से पकाया गया है। ऐसे मामलों में निश्चित निष्कर्ष के लिए प्रयोगशाला जांच और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट अधिक महत्वपूर्ण होती है।
इसलिए उपभोक्ताओं को अफवाहों के बजाय आधिकारिक जांच रिपोर्ट पर भरोसा करना चाहिए।
खाद्य कारोबारियों पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
तारकेश्वर की कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बाजार तक पहुंचने से पहले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी कितनी प्रभावी है। फल कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करें और प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल न करें।
वहीं, प्रशासन की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई हो और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही पहुंचें।
तारकेश्वर में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बरामद रसायनों की जांच में क्या सामने आता है और संबंधित कारोबारियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
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