खड़गपुर ब्यूरो | 27 जुलाई 2026: कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का अंदाज कुछ अलग ही नजर आया।
यहां ताम्रलिप्त नगरपालिका क्षेत्र की दो स्वयंसेवी संस्थाओं ‘तमलुक बाइकर्स’ और ‘हाथ बढ़ालेई बंधु’ ने संयुक्त रूप से ऐसा स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया, जिसमें देशभक्ति, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और बंगाल की लोक संस्कृति—चारों का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और पौधारोपण के साथ हुआ। इस अवसर पर हाल ही में दिवंगत प्रख्यात लेखक एवं शिक्षक डॉ. मौसम मजूमदार को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
रक्तदान शिविर में महिलाओं सहित 61 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर कारगिल के अमर शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। ताम्रलिप्त गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ब्लड सेंटर की टीम ने रक्त संग्रह किया।
अनोखा सम्मान
आयोजकों ने रक्तदाताओं को केवल प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रत्येक रक्तदाता को एक-एक पौधा भेंट किया गया।
वहीं स्मृति-चिह्न के रूप में शांतिनिकेतन की लोकशिल्प परंपरा और बंगाल की बाउल संस्कृति के प्रतीक ‘एकतारा’, जिसे हाल ही में जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग प्राप्त हुआ है, भेंट कर आयोजन को विशेष पहचान दी गई।
इस अनूठे सम्मान से रक्तदाता और अतिथि दोनों ही भावुक और उत्साहित दिखाई दिए। कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग भी मिला। ‘हाथ बढ़ालेई बंधु’ के सदस्यों ने गिटार की धुन पर गीत प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को जीवंत और उत्साहपूर्ण बना दिया।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
उद्घाटन समारोह में कई प्रतिष्ठित चिकित्सक, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद रहे। इनमें डॉ. स्वर्णसिन्धु भौमिक, डॉ. हिमाद्री शेखर कर, डॉ. संग्राम दोलाई, ताम्रलिप्त नगरपालिका के वार्ड संख्या-19 की पार्षद शरबरी चक्रवर्ती, वार्ड संख्या-12 की पार्षद जया दास नायक, समाजसेवी संदीप चक्रवर्ती, आनंद नायक, देवकमल दास, शुभंकर नारायण जना, गौरांग गुच्छाइत, शुभदीप चक्रवर्ती तथा शिक्षिका सुपर्णा मजूमदार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजकों का बयान
तमलुक बाइकर्स की ओर से अरिजीत पाल ने कहा:
“हम सिर्फ बाइक राइड और एडवेंचर तक सीमित नहीं हैं। समाज और जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा रहना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोविड महामारी के कठिन दौर से लेकर आज तक हम विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों की सेवा करते आ रहे हैं और भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा।”
निष्कर्ष: कारगिल विजय दिवस पर आयोजित यह आयोजन केवल रक्तदान शिविर नहीं रहा, बल्कि शहीदों के सम्मान, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और लोक संस्कृति के संरक्षण का ऐसा संदेश बन गया, जिसकी पूरे तमलुक में सराहना हो रही है।
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