गुरु पूर्णिमा पर विशेष : गुरु-सम्मान

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। आज कई दिनों के बाद अचानक उनसे मेरी नजरें मिल गयीं।

बरषा काल मेघ नभ छाए, गरजत लागत परम सुहाए

श्री राम पुकार शर्मा, हावड़ा। प्रकृति सर्वदा से ही मानव सहित समस्त चराचरों के पल-पल

देखो खिल-खिल मुस्काता कदम्ब फूल

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। कदंब का पेड़, जिसे ‘प्रेम का वृक्ष’ भी कहा जाता है।

मातृ दिवस विशेष : ‘माता गुरुतरा भूमे:’

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। ‘माता गुरुतरा भूमे:’ अर्थात ‘माता भूमि से भी अधिक भारी होती

श्रीराम नवमी पर विशेष : ‘बंदउँ बालरूप सोइ रामू’

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। किसी भी प्राणी का बाल स्वरूप अपनी निर्बोधता के कारण मूलतः

विशेष : सनातन हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2081

‘अपने संग लाई है उषा अतुलित हर्षित-स्वर्ण संपदा, आज प्राची में नव वर्ष का, शस्य

जयंती विशेष : ‘हिंदी साहित्य जगत की अग्रणी लेखिका – ‘मन्नू भंडारी’

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। देशी शक्तियों से देश की राजनैतिक आजादी तो १९४७ में प्राप्त

मैं बिहार हूँ

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। मैं, देवनदी गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, महानदी, सोन, ब्रह्मपुत्र

‘डार डार पर बोले कारी कोयलिया, रूत आ गई वसंत की सारी डगरिया’

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। आज ही एक हरितिमा युक्त साधारण-सा कृत्रिम शहरी बाग में प्रातः

श्रीराम पुकार शर्मा की कलम से : ‘शरद् विगत भयो, आगम शिशिर ऋतु’

श्रीराम पुकार शर्मा, हावड़ा। शरद् ऋतु के मंद-मंद शीतल सुहावन मौसम, जलाशयों में खिले हुए