विनय सिंह बैस की कलम से – ‘समर हॉलीडे’

रायबरेली। यह उन दिनों की बात है जब ‘हॉलीडे होमवर्क’ जैसी क्रूर प्रथा चलन में

क्या स्त्रियों के पेट में कोई बात सचमुच हजम नहीं होती?

नई दिल्ली। हम कुल मिलाकर चार भाई-बहन थे। सबसे बड़े भैया, फिर मैं, मेरे बाद

विनय सिंह बैस की कलम से – फोटोजीवी किसान

रायबरेली। आधुनिक मशीनों वाले इस समय की तो खैर क्या ही बात करूं लेकिन आज

विनय सिंह बैस की कलम से – तिसुआ सोमवार

रायबरेली। चैत्र मास के चारों सोमवार को ‘तिसुआ सोमवार’ कहा जाता है। इन चारों सोमवार

विनय सिंह बैस की कलम से – बैसवारा के बरी गांव की होली की यादें

नई दिल्ली। कहने को तो होली फागुन मास की पुन्नवासी (पूर्णिमा) को मनाई जाती है

विनय सिंह बैस की कलम से… ढाई आखर प्रेम का

नई दिल्ली। ‘प्रेम’ के ढाई आखर पंडित ही नहीं आमजन भी सृष्टि की शुरुआत से,

विनय सिंह बैस की कलम से – बैसवारा की कतकी/कार्तिक पूर्णिमा!

“करवा हैं करवाली, उनके बरहें दिन दिवाली। उसके तेरहें दिन जेठुआन, और फिर चुटिया-पुटिया बांध

विनय सिंह बैस की कलम से : बचपन वाली दीपावाली!!

रायबरेली। बचपन की दीपावली का मतलब छोटी दीपावाली, बड़ी दीपावली और उसके बाद गंगा स्नान

विनय सिंह बैस की कलम से – कातिक आने को है!!

रायबरेली। अब सुबह-शाम गुलाबी ठंड पड़ने लगी है। घास में पड़ने वाली ओस सूरज की

विनय सिंह बैस की कलम से : पूर्वजों को आमंत्रण

रायबरेली। बैसवारा में शादी-ब्याह जैसे शुभ अवसरों पर हम परमात्मा, अपने परिवारजनों, रिश्तेदारों और इष्ट