इंटरटेनमेंट न्यूज़ डेस्क | 22 फरवरी 2026: भारतीय सिनेमा में महिला प्रधान फिल्मों ने अब मजबूत जगह बना ली है। तापसी पन्नू ने ऐसी कई फिल्मों से समाज की सोच को चुनौती दी है।
उनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। तापसी की फिल्में न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा छेड़ी।
‘पिंक’ में ‘नो मींस नो’ का संदेश
2016 में रिलीज ‘पिंक’ में तापसी ने महिलाओं की मर्जी और सम्मान पर जोर दिया। फिल्म का डायलॉग “नो मींस नो” समाज में व्यापक चर्चा का विषय बना।

फिल्म ने महिलाओं की भावनाओं को तवज्जो दी और संकीर्ण धारणाओं पर प्रहार किया।
‘सांड की आंख’ में उम्र की कोई सीमा नहीं
2020 में आई ‘सांड की आंख’ में तापसी ने प्रकाशी तोमर का रोल निभाया। फिल्म साठ साल की दो बहनों पर बनी थी, जो निशानेबाजी में सफल हुईं।
फिल्म ने पितृसत्तात्मक सोच और उम्र के साथ आने वाली बाधाओं को उजागर किया।
‘थप्पड़’ में घरेलू हिंसा का मुद्दा
2020 में रिलीज ‘थप्पड़’ ने घरेलू हिंसा पर रोशनी डाली। फिल्म में एक थप्पड़ के बाद रिश्तों और सम्मान के सवाल उठाए गए। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 44 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया और व्यापक सराहना मिली।
‘बदला’ ने ओटीटी पर नई शुरुआत की
2019 में आई ‘बदला’ ने ओटीटी पर नई लहर लाई। तापसी ने एक मर्डर केस में फंसी महिला का किरदार निभाया।
फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 7.7 रही और उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हुई।
अन्य महत्वपूर्ण फिल्में
तापसी की ‘रश्मि रॉकेट’ (2021) महिला खिलाड़ियों के संघर्ष पर बनी। फिल्म में जेंडर टेस्टिंग और भेदभाव जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया।
‘हसीन दिलरुबा’, ‘ब्लर’, ‘शाबाश मिठू’ और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्मों ने भी सामाजिक मुद्दों को उठाया।
तापसी पन्नू की फिल्मों ने महिलाओं के संघर्ष और सशक्तिकरण को मुख्यधारा में लाया है। उनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
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