जूझ रहीं हैं प्रतिभाएँ बेकारी से, सिंह दूब चरते हैं अब लाचारी से : रवि प्रताप सिंह

कोलकाता । राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘शब्दाक्षर’ प. बंगाल द्वारा काशीपुर, गोविंद बाजार, कोलकाता में आयोजित प्रादेशिक मासिक कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों ने एक से बढ़कर एक कविताएँ पढ़ीं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता शब्दाक्षर के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दया शंकर मिश्र ने की। बतौर प्रधान अतिथि शब्दाक्षर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह एवं विशिष्ट अतिथि पंच प्रदेश प्रभारी विश्वजीत शर्मा सागर की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन शब्दाक्षर प. बंगाल प्रदेश अध्यक्ष कवि जय कुमार रुसवा, संयोजन प्रदेश साहित्य मंत्री अंजू छारिया तथा धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सलाहकार तारक दत्त सिंह ने किया। कवि सम्मेलन का शुभारंम्भ सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। रवि प्रताप सिंह की “जूझ रहीं हैं प्रतिभाएँ बेकारी से, सिंह दूब चरते हैं अब लाचारी से। पुरखों का बदला नस्लों से लेते हैं, आशाओं के वृक्ष कट रहे आरी से, दो पल बैठ कहाँ पर सुस्ताया जाए, शीतल छाया विमुख है ज़िम्मेदारी से” पंक्तियों पर खूब वाहवाहियाँ लगीं।

अंजू छारिया की, “छोड़ गया तू रोता क्यूं, प्यार में ऐसा होता क्यूं”, जीवन सिंह की, “सावन के महीना घेरे बदरिया, बरसेला पनिया बीच आंगन में..”, हीरालाल साव की, “बहुत गहरा रिश्ता भी इक पल में ही टूट गया, जब मैंने सत्य कहा कोई ना कोई रुठ गया..”, जय कुमार रुसवा की, “हाय बला की अदा दिखाई ज़ालिम ने, कितना ही बोला था अच्छे लगते हो, करवा दी जग में रुसवाई ज़ालिम ने..”, कृष्ण कुमार दूबे की, “हसीन ख्वाब का मंजर अगर नहीं होता, मोहब्बतों के बिना घर भी घर नहीं होता…..” तथा विश्वजीत शर्मा सागर की लक्ष्मीचंद की पुस्तक छपती, प्रेमचन्द रह जाता है। एक बूँद रस नहीं है जिसमें, वह ‘सागर’ कहलाता है…” पर श्रोतागण झूम उठे।

कार्यक्रम अध्यक्ष दयाशंकर मिश्र, सुधा मिश्रा, तथा आदित्य त्रिपाठी की रचनाओं की भी जमकर तारीफ हुई। कवि सम्मेलन में कामेश्वर सिंह, संजय कुमार सिंह, त्रिलोकी नाथ प्रसाद, गिरजा शरण सिंह, दिनेश सिंह, प्रदीप सिंह, बेचैन सिंह, शशिकांत तिवारी, अनंत किशोर मिश्र आदि की भी सक्रिय उपस्थिति रही। वहीं दूसरी ओर शब्दाक्षर के केन्द्रीय पेज से प्रसारित किये जा रहे जमीनी कार्यक्रमों में जुड़ीं शब्दाक्षर की राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह-प्रसारण प्रभारी प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दाक्षर प. बंगाल द्वारा आयोजित मासिक कवि सम्मेलन की सफलता पर खुशी जताते हुए बतलाया कि बिहार में भी शब्दाक्षर भागलपुर द्वारा आयोजित मासिक कवि सम्मेलन भी काफी भव्य रहा।

डॉ. रश्मि ने शब्दाक्षर बिहार प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र, भागलपुर जिलाध्यक्ष विकास सोलंकी एवं संचालिका पिंकी मिश्रा सहित जिला समिति के सभी सदस्यों को राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सिंह सहित समस्त शब्दाक्षर परिवार की ओर से शुभकामनाएँ देते हुए शब्दाक्षर के राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते साहित्यिक वर्चस्व को समर्पित स्वरचित पंक्तियाँ, “होता रहे पल्लवित, पुष्पित प्रतिदिन शब्दाक्षर परिवार, शब्दाक्षर के काव्य-साधकों को बधाइयाँ बारंबार, हिन्दी का परचम लहराएँगे हम सारे मिलकर के, देखेगा यह सारा भारत, देखेगा सारा संसार..” निवेदित कीं।

राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने शब्दाक्षर भागलपुर द्वारा पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से शब्दाक्षर पदाधिकारियों द्वारा प्रेषित शुभकामनाओं की भव्य प्रस्तुतियों को अनुकरणीय बताते हुए काफी प्रशंसा की। केन्द्रीय पेज से जुड़े शब्दाक्षर पदाधिकारी सुबोध कुमार मिश्र, सत्येन्द्र सिंह सत्य, सागर शर्मा आजाद, निशांत सिंह गुलशन, महावीर सिंह ‘वीर’, श्यामल मजूमदार, राजीव खरे, स्मृति कुलश्रेष्ठ, पं. बालकृष्ण, वंदना चौधरी, शशिकांत मिश्र, भीमराव झड़बड़े आदि अनेक दर्शकों ने भी दोनों कवि सम्मेलनों का जमकर लुत्फ़ उठाया।

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