खड़गपुर ब्यूरो | 27 सितम्बर 2026: बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पलटवार किया।
उन्होंने दावा किया कि इन नामों को हटाए जाने के लिए भाजपा अथवा चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
संवाददाता सम्मेलन में क्या कहा?
साल्टलेक स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद न्यायिक अधिकारियों ने संबंधित मामलों की जांच कर निर्णय लिया था।
उन्होंने इसके लिए ममता को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मामला उन्हीं की ओर से अदालत में ले जाया गया था।
मुख्यमंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर तृणमूल कांग्रेस, वामदलों और उनके सहयोगी दलों के बयानों की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा चुनाव में जनता से मिले स्पष्ट जनादेश को स्वीकार करने के बजाय एसआईआर को लेकर विपक्ष की ओर से जानबूझकर भ्रम और दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है।
SIR की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि एसआईआर के दौरान ‘लाजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के दायरे में आए करीब 60 लाख मतदाताओं के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद न्यायिक अधिकारियों ने सुनवाई की थी।
इनमें करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम बाद में सूची से हटा दिए गए थे। इन फैसलों के खिलाफ अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल भी गठित किए गए हैं।
ममता गुट की मांग पर प्रतिक्रिया
शुभेंदु ने ममता गुट की उस मांग पर भी निशाना साधा, जिसमें मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम फिर शामिल कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केरल में एसआईआर अच्छा है और बंगाल में खराब। हम 208 सीटें जीते और वे दोनों पक्ष मिलाकर 80 पर रह गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता जनादेश स्वीकार नहीं कर पा रही हैं।
शुभेंदु ने कहा कि एसआईआर में जिन मामलों में न्यायिक अधिकारियों ने निर्णय लिया, उसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत पूरी प्रक्रिया हुई और उसके आधार पर ही संबंधित मतदाताओं के बारे में फैसला लिया गया।
ममता के आरोपों का जिक्र
मालूम हो कि एक दिन पहले ममता ने शनिवार को हुगली जिले के श्रीरामपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग पर एसआईआर के जरिये वैध मतदाताओं के नाम हटाकर भाजपा को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए आंदोलन जारी रखने की बात भी कही थी।
चुनाव आयोग का बचाव
मुख्यमंत्री ने एसआईआर संबंधी फैसलों में चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की हालिया रिपोर्ट सामने आने के बाद से जारी सियासी घमासान पर भी राय रखते हुए चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया का बचाव किया।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित तीनों चुनाव आयुक्तों की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि आयोग के निर्णय किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिए जाते। उन्होंने ममता की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाए जाने पर भी सवाल उठाया।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

