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सुरेश शर्मा की कविता : आओ होली खेलें

।।आओ होली खेलें।।

आओ होली खेलें
आओ होली खेलें।
जिंदगी को नई उमंग दे
इसे खुशियों के रंगो से रंग दे,
लाल तो खून भी होता है
पर खेल रंगो का हो
विश्व भर में शांति ही शांति हो
न माहौल जंगो का हो,
रंगो का रंग एक जैसा नहीं होता
हरा, पीला, नीला, गुलाबी और होता कोई लाल
वैसे ही सब इंसान एक जैसा नहीं होता
सबका होता है अपना अपना ख्याल,
आओ हम सारे पुराने गिले शिकवे
भेद भाव मिटा दे
हम सब एक जैसा ही दिखें
आओ ऐसा रंग लगा दे,
तन भी रंग ले मन भी रंग ले
कोई रंग कोई अंग ना छूटे
हर रंग से हर अंग अंग रंग ले।
आओ होली खेलें
आओ होली खेलें।

सुरेश शर्मा

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