नई दिल्ली/कोलकाता | 1 दिसंबर 2025 : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर नई अर्जी पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने आयोग से जवाब मांगा है कि मतदाता सूची में नाम कटने और नागरिकता से जुड़े विवादों पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
🌟 अर्जी में क्या कहा गया?
- हिंदुओं, बांग्लादेश से आए बौद्धों और ईसाइयों ने अर्जी दायर की।
- मांग की गई कि उन्हें अस्थायी तौर पर SIR प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
- याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील करुणा नंदी ने कोर्ट को बताया:
- याचिकाकर्ता 2014 से बहुत पहले भारत आए थे।
- इसके बावजूद उन्हें CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) के तहत सुरक्षा नहीं मिली।
- उन्होंने कहा कि बसुदेव फैसले में दिए गए प्रावधान लागू किए जाने चाहिए।
दायर अर्जी में हिंदुओं, बांग्लादेश से आए बौद्धों और ईसाइयों ने एसआईआर प्रक्रिया में अस्थाई रूप से शामिल करने की मांग की गई है. कोर्ट 9 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
- कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
- अगली सुनवाई की तारीख 9 दिसंबर 2025 तय की गई है।
- अदालत ने संकेत दिया कि यदि वैध कारण दिखाए गए तो आयोग को ड्राफ्ट रोल्स की समयसीमा बढ़ाने का आदेश भी दिया जा सकता है।
हिंदुओं, बांग्लादेश से आए बौद्धों और ईसाइयों की ओर से पेश वकील करुणा नंदी ने कोर्ट को बताया कि 2014 से बहुत पहले याचिकाकर्ता आए थे, फिर भी उन्हें सीएए के तहत सुरक्षा नही मिली है.

उन्हें कहा कि बसुदेव फैसले में दिए गए प्रावधानों को लागू किया जाना चाहिए और अस्थायी तौर पर एसआईआर प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए.
🌍 राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
- पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान लाखों नाम हटाए जाने की खबरों ने विवाद खड़ा किया है।
- विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कदम मतदाताओं को वंचित करने के लिए उठाया गया है।
- वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों जगह 23 साल बाद एसआईआर कराया जा रहा है. इससे पहले इन दोनों राज्यों में आखिरी बार 2003 में हुआ था. एसआईआर का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना है. इसमें पुराने नाम हटाना शामिल हैं.
छह याचिकाओं पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम सिर्फ इसलिए भेदभाव नही कर सकते कि कोई जैन, बौद्ध आदि है. हमें मान्य नागरिकता को देखना होगा. कोर्ट ने कहा अधिकार तो है, लेकिन अधिकार को मामले के आधार पर देखा जाना चाहिए.
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुड्डुचेरी सहित कुछ अन्य जगहों पर एसआईआर को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि आप लोग इतने आशंकित क्यों है. आप ऐसे कर रहे है, जैसे पहली बार मतदाता सूची का सघन पुनरीक्षण हो रहा हो.
बंगाल में टीएमसी विधायक की धमकी वाले वीडियो के बीच घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने वाले बीएलओ की सुरक्षा मुस्तैद करने की मांग उठी है.
पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसद डोला सेन और पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस समिति ने एसआईआर को चुनौती दी है, जबकि सीपीआईएम और डीएमके ने तमिलनाडु में एसआईआर को चुनौती दी थी.
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