संवाद सूत्र, खड़गपुर। दक्षिण कोलकाता के न्यू अलीपुर में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा तोड़े जाने की घटना के विरोध में एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) की ओर से पूर्व मेदिनीपुर जिले के मेछेदा, बुड़ारी, रामतारक सहित विभिन्न स्थानों पर विरोध जुलूस और प्रदर्शन सभाएं आयोजित की गईं।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नेताजी सुभाषचंद्र बोस सहित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने और उन पर कालिख पोतने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेताजी के नाम पर मौजूद कुछ सड़कों के नाम बदलकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किए जा रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि रात के अंधेरे में तो कहीं दिनदहाड़े नेताजी की प्रतिमाओं को तोड़े जाने की घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं के खिलाफ शुभबुद्धि संपन्न लोगों के लगातार विरोध के बाद मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, एसयूसीआई नेताओं का आरोप है कि इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार जारी हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तो दूर, कई मामलों में अब तक किसी की गिरफ्तारी तक नहीं हुई है। इस मुद्दे पर वक्ताओं ने मुख्यमंत्री की कथित विरोधाभासी भूमिका की आलोचना की और महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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