कोलकाता। “किसी साहित्यकार के जन्म-शताब्दी वर्ष का पालन व संगोष्ठी का आयोजन पाठक समाज के उनकी रचनाओं से सम्बद्धता की ओर संकेत करता है। लेखक का सामाजिक-सांस्कृतिक दायित्व के प्रति सम्बद्धता-सचेतनता ही उसे कालजयी बनाता है।”
ये उद्गार हैं सेंट पॉल्स कैथेड्रल मिशन कॉलेज के उपाचार्य प्रो. विनायक भट्टाचार्य के जो ‘मोहन राकेश : विविध साहित्यिक आयाम’ विषयक छात्र-संगोष्ठी में बोल रहे थे । विभाग के षष्ठम्, चतुर्थ एवं द्वितीय सत्र के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया,
जिसमें प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार क्रमशः पलक सिंह, रोशनी सिंह और संयुक्ता दत्ता को प्रदान किया गया। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश पाण्डेय ने स्वागत भाषण में मोहन राकेश के संघर्षपूर्ण जीवन एवं अस्तित्ववादी चिंतन पर प्रकाश डाला।

कॉलेज के कोषाध्यक्ष प्रो. शुभेन्दु कांजीलाल ने विद्यार्थियों को संगोष्ठी के माध्यम से सीखने पर बल दिया।
बांग्ला विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. शेख मकबूल इस्लाम ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि मोहन राकेश का साहित्य आजादी के बाद के समाज-परिवार के आन्तरिक गाँठ को खोलने का प्रयास करता है ।
कार्यक्रम का संचालन किया प्रो. आरती यादव ने और धन्यवाद ज्ञापन किया प्रो. परमजीत पंडित ने। प्रो. मौसमी मुखर्जी, प्रो. सुतापा दास गुप्ता, प्रो. अनुसूया भर, प्रो. अनामित्रा सरकार, प्रो. तयना चटर्जी, प्रो. त्रिदिब चटर्जी, प्रो. कुश सेनगुप्त, प्रो. सईद आयेशा अली, प्रो. श्यामोश्री मुखर्जी, प्रो. प्रमा पाल,
प्रो. अनिंदिता सरकार, प्रो. शुभदीप सरकार, प्रो. जिहिस्केल नस्कर, प्रो. प्रीतम रजक आदि विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयेशा, विवेक, सुमित, संजना, अंशु, प्रिंस, निकिता, अमरनाथ, पायल आदि विद्यार्थियों की मुख्य भूमिका रही ।
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