अशोक वर्मा “हमदर्द” की कहानी : लव जिहाद एक धोखा

अशोक वर्मा “हमदर्द” कोलकाता। जब कोई बेटी का बाप अपनें बेटी के कुकृत्य की वजह समाज से आंख नही मिला पाता और किसी भी सभा का सभाषद बनने के बाद भी दिल में एक टीस और डर कायम रहता है की कहीं कोई सबके सामनें अंगुली न उठा दे। यह केवल इसलिए होता है की एक बेटी आधुनिकता के चरम को पार करनें के बाद अपनें हवस को मिटाने के लिए सही और गलत का फर्क न करते हुए अपनें छद्मवेशी प्रेमी के जाल में फंस कर मां, बाप, भाई, बहन तमाम रिश्तों को त्याग देती है और उसका परिवार अंतिम सांस तक समाज में घूंट-घूंट के जीता है और अंदर ही अंदर रोता है, दुःख तो तब होता है जब ऐसी बेटियों का अंत या तो सूटकेस में बंद होता है या फिर अनगिनत टुकड़ों में कट कर। पुलिस जब तहकीकात करती है तो मामला लव जिहाद का होता है।

where there is no vision the pepole perish. जहां दूरदर्शिता नहीं है वहां लोगों का नाश होता है। लव जिहाद में फसनें वाली ज्यादातर लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त होती है। 2022 के आंकड़ों पर ध्यान दिया जाय तो एक अनुमान के मुताबिक 153 लड़कियां लव जिहाद की शिकार हुई है जिसमें से कई लड़कियों की जान तक चली गई। यह लिस्ट सिर्फ उनका संकलन है जिन्होंने हिम्मत कर रिपोर्ट दर्ज़ करवाई लेकिन लोकलाज के डर से बहुत ऐसे मामले है जो चर्चा तक में भी नही आते। ठीक उसी प्रकार की एक बेटी की कहानी प्रस्तुत करनें जा रहा हूं जो लव जिहाद की शिकार होकर अपनें जीवन को तो खत्म नहीं की किंतु उस दरिंदे से निजात जरूर पा ली।

अशोक वर्मा “हमदर्द”, लेखक

आज यश बाबू बहुत खुश थे क्योंकि उनकी इकलौती बेटी यूपीएससी की तैयारी करनें हेतु दिल्ली जा रही थी।यश बाबू का सपना था की उनकी इकलौती बेटी नीलम देश के सर्वोच्च परीक्षा यूपीएससी को देकर देश के एक प्रतिष्ठित पद को हासिल करे और अपनें खानदान सहित अपनें देश और नगर का नाम रौशन करे। नीलम बचपन से ही काफी तेज तर्रार और मेधावी थी। उसके स्कूल के शिक्षक भी काफी उत्साह के साथ नीलम का ख्याल रखते। उन्हें यह हमेशा लगता की नीलम एक ऐसी होनहार लड़की है जो आगे चलकर जरूर अपने विद्यालय का नाम रौशन करेगी। इधर यश बाबू का अपनें शहर में अच्छा खासा मान सम्मान था। उनकी हर बातों पर लोग अमल करते। यश बाबू की जिंदगी काफी सुखद थी। इधर नीलम ने दिल्ली जाकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी। यश बाबू को अपनें बेटी पर पूरा भरोसा था की वो अकेले रह कर भी अपनें मान सम्मान के साथ पढ़ाई करेगी।

शाम का समय था रोज रोज की पढ़ाई से समय निकाल कर आज नीलम अपनें रूम मेट रंजना के साथ बाहर घूमने निकल पड़ी। चलते-चलते दोनो एक पार्क में पहुंची थी, हाथ में चिप्स के पैकेट और कोल्डड्रिंक का बोतल लेकर पार्क में बैठने के लिए बनें स्लैब पर बैठ गई और आपस में बातें करने लगी। तभी एक स्मार्ट सा लड़का ललाट पर तिलक और हाथ में कलावा बांधे एक खूबसूरत से बच्चे को अंगुली पकड़ा कर टहला रहा था। वो टहलाते-टहलाते बच्चे को लेकर नीलम और उसके सहेली की तरफ आ रहा था। बच्चा भी बहुत सुंदर और प्यारा था अतः उसे पार्क में न चाहते हुए भी लोग छूकर प्यार करनें को मजबूर हो जाते जो नीलम और रंजना को दिख रहा था। देखते-देखते बच्चा बहुत करीब आ गया और नीलम के मुंह से सहसा आवाज निकल गई बहुत प्यारा बच्चा है। यह आवाज जैसे ही रोहन के कान में आई वो तुरंत रुक गया और बच्चे से कहने लगा, बेटे – देखो तुम्हारी तारीफ हो रही है थैंक्यू तो बोलो, बच्चे ने अपनें तुतले ज़ुबान से थैंक्यू बोला।

तभी रंजना ने उस बच्चे से पूछा बेटा आपका नाम क्या है? बच्चे ने तपाक से उत्तर दिया, राजा नाम है मेरा और ये कौन है नीलम ने उस लड़के की तरफ इशारा करके कहा तो बच्चे ने फिर एक बार उत्तर दिया ये मेरे चाचू है। तभी उस बच्चे ने अपने चाचू से कहने लगा!चाचू आपने आइस्क्रीम खिलानें को कहा था चलो ना चाचू मुझे आइस्क्रीम खानी है और दोनो आगे बढ़ चले थे।कुछ क्षण बाद रंजना और नीलम अपने रूम की तरफ चल पड़ी थी। समय निकलता चला गया और नीलम अपने पढ़ाई की तैयारी में जोर शोर से लग गई थी। बीच-बीच में जब भी मन अशांत होता मन बहलाने नीलम पार्क में चल जाया करती। अचानक एक दिन नीलम की मुलाकात पुनः उस लड़के से हो गई, आज वो अकेला था तभी नीलम ने उस लड़के से पूछ लिया आज राजा नही आया? तभी उस लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा नही आज राजा नही आया है और आप भी आज अकेली आप की सहेली नही आई। तभी नीलम ने भी मुस्कुराते हुए कहा वो अपनें गांव गई है।

आप बुरा न मानें तो पूछूं, आप कहां रहती है और आपका नाम क्या है? मेरा नाम नीलम है और मैं मुखर्जी नगर में रहती हूं,ऐसे तो मैं बिहार से हूं और यहां यूपीएससी की तैयारी करने के लिए आई हूं। ठीक है मजे से पढ़ाई कीजिए कह कर वो लड़का चुप हो गया। वो चाह रहा था की नीलम और बात को बढ़ाए फिर उससे दोस्ती किया जाए। तभी नीलम ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा – आपने मेरा नाम तो पूछ लिया किंतु अपना नाम नही बतलाया? मेरा नाम रोहन है मैं यहीं पड़ोस में रहता हूं मेरे पापा का गाड़ी का काम है जिसे मैं और मेरे पापा मिलकर चलाते है।आपने पढ़ाई नही की? नीलम ने पूछा, तभी रोहन ने कहा की न, मैने एमबीए की है। एमबीए करने के बाद सोचा दूसरे की नौकरी यानी नौकर बनने से बेहतर है अपना ही कुछ किया जाय। मैं अपनें मां बाप का अकेला संतान हूं। मेरे दादा जी हरियाणा के एक रईस व्यक्ति थे आपार संपत्ति के मालिक थे।

अब वो इस दुनियां में नही है। उसके बाद मेरे पापा गांव छोड़ दिल्ली आ गए और यही गाड़ी का कारोबार करने लगे, अरे भाई! केवल मैं ही बोले जा रहा हूं सॉरी! चंद मिनटों में मैने आपको अपना पूरा इतिहास भूगोल ही बता दिया, खैर! आप बुरा न मानें तो आपका मोबाईल नंबर ले सकता हूं, बीच बीच में बातें होती रहेगी और ऐसे भी मुझको एक मित्र मिल जायेगा और आप को एक मददगार। आप अकेली रहती है दिल्ली का माहौल ठीक नही रहता, यहां के लोग छलावा भरी झूठी शानों शौकत में अपनी जिंदगी जीते है। कोई समस्या हुई बस फोन करने की देर नही बंदा हाजिर। नीलम को रोहन का हावभाव अच्छा लग रहा था। उसके ललाट पर नित्य तिलक हाथ में कलावा देख कर लगता ये किसी सभ्य परिवार का संस्कारित लड़का है जो इस आधुनिक युग में भी धर्म धारण करता है। उसने अपना फोन नंबर रोहन को दे दिया तभी रोहन ने फोन कर के ये जता दिया की यह मेरा नंबर है और नीलम ने रोहित के नंबर को दोस्त लिखकर अंकित कर लिया।

तभी एक बार रोहन ने नीलम से कहा जब हम लोग दोस्त बन ही गए है तो क्यों न आज मुंह मीठा हो जाए। हम लोग किसी अच्छे से रेस्टोरेंट में चलें, तभी नीलम ने कहा नही-नही मैं नही जा सकती इसलिए की मैं अपना पर्स अपनें रूम में ही छोड़ कर आ गई हूं। थोड़ा समय था अतः टहलने आ गई हूं। ये बातें सुनकर रोहन ने नीलम से कहा – गज़ब की बातें करती है आप भी, एक तरफ मित्रता की बात और दूसरी तरफ पैसों को लेकर हिचक। ऐसा नहीं हो सकता, प्रभु का दिया हुआ बहुत है आप संकोच न करें और नीलम ना-ना करते हुए भी आगे बढ़ गई और रोहन अपनें मिशन में कामयाब हो गया था। कुछ दूर चलने के बाद रोहन नीलम को एक बहुत बड़े रेस्टोरेंट में ले गया जहां का नज़ारा देख कर नीलम चकित थी, वहां आने वाले हर लोग रईस लग रहे थे जो आधुनिक कपड़ों में सजे सवरे थे। तभी वेटर ने टेबल पर मेन्यू चार्ट रख दी और रोहन ने नीलम की तरफ बढ़ा कर कहा आप क्या लेंगी ऑर्डर करें किंतु क़ीमत नही दिखेंगी नही तो मैं नाराज हो जाऊंगा, खानें पीने वाले चीजों की कीमत नही देखते।

नीलम मन ही मन सोच रही थी की बात तो सही है किंतु हम लोग हमेशा से अपनें बजट के अंदर ही हर कार्य करते है। उसने रोहन को अपनी इच्छा बता दी, जब तक वेटर डिमांड पूरी करता दोनों बातों में मशगूल हो गए। कुछ क्षण बाद खाने पीने का आनंद लेकर रोहन और नीलम रेस्टोरेंट के बाहर आ गए। तभी रोहन ने नीलम से कहा, आप मन लगाकर पढ़िये जब भी किसी चीज की आवश्यकता हो एक फोन घूमाकर मुझसे कहिए और हां कभी दूर जाना हो तो एक दिन पहले मुझे बोल दीजिएगा मैं गाड़ी लेकर ड्राइवर भेज दूंगा या समय रहने पर मैं खुद आ जाया करूंगा। नीलम ने स्वीकृति में सर हिला दी और दोनो अपने-अपने घर आ गये। वहां से आने के बाद आज प्रथम बार नीलम का दिल पढ़ाई में नही लग रहा था। उसे रोहन की हर बातें याद आ रही थी। शायद मन ही मन नीलम को रोहन भा गया था।

इधर रोहन अपनें मिशन में कामयाब होने के बाद अपनें मिशन के सरगना जलालू शेख के पास पहुंचा। रोहन के चेहरे पर हंसी के भाव को देखकर जलालु शेख ने कहा! आओ अनवर बड़े खुश नजर आ रहे हो? तभी रोहन ने ज़लालू शेख को अस -सलामू अलयकुम चाचा जान, तभी जालालु शेख ने वालईकुम सलाम, अनवर बाबू! बोलो क्या खबर लाये हो, तुम तो हाथ में कलावा और ललाट पर तिलक लगाकर बिल्कुल हिंदु पांडा बन गए हो, बस चुटिया की कमी है। तभी अनवर ने जलालू शेख से कहा मेरा नाम रोहन है और मैं कट्टर हिंदू हूं समझे चाचा जान और दोनो ठहाका मार कर हंसने लगे। चाचा जान क्या माल मिली है ऊंचे खानदान की है यूपीएससी की तैयारी कर रही है और सादगी की मूरत है। बढ़िया बहुत बढ़िया, आगे चल कर अपनें मिशन के लिए काम करेगी क्योंकि इस मिशन के लिए बहुत दिमाग की आवश्यकता होती है। किंतु एक बात समझ में नही आई की सादगी के इस मूरत को घर लाकर केवल पूजा ही मत करना। सुवरिया से बच्चे भी चाहिए वो भी दर्जनों, तौबा तौबा नापाक हो गया मेरा मुंह किसका नाम ले लिया मैं जलालू शेख ने कहा!

तभी रोहन ने जलालू शेख से कहा – चाचा और पचास चाहिए बड़े घर की एकलौती बेटी है खर्च बढ़ चढ़ नही होगा तो वो मेरे पास क्यों आयेगी? बात तो ठीक है पैसों की कोई दिक्कत नही होगी किंतु मिशन कामयाब होना चाहिए। हमें भी हमारे आकाओं को जवाब देना पड़ता है। जलालू शेख ने अपनी अलमारी खोली और 500 सौ का एक गड्डी रोहन की तरफ उछाल दिया। रोहन ने गड्डी को चूमते हुए जलालु शेख से कहा -चाचा जान कभी कभी चारपहिया गाड़ी की भी जरूरत पड़ सकती है। क्योंकि मेरे पास चारपहिया कीमती गाड़ी है और हो भी क्यों नही मेरे पिता की अपनी गाड़ी की शो रूम जो है। बेटा गज़ब का फेका है और दोनो ठहाका मार कर एक बार फिर हंसने लगे। इधर नीलम का मन पढ़ाई में नही लग रहा था वो रोज शाम पार्क में पहुंच जाती और रोहन को खोजती और नही पाने पर निराश होकर लौट जाती। नीलम ने कई बार रोहन को फोन भी मिलाया किंतु उसे स्विच ऑफ मिलता। रोहन भी सोच रहा था की नीलम की बेचैनी बढ़े और यह रिश्ता और भी मजबूत हो।

समय निकलता चला गया और अचानक एक दिन नीलम के फोन पर एक मैसेज आया डियर कस्टमर रोहन इज नाउ एवलिलेबल टू टेक कॉल्स। यह मैसेज देख नीलम खुश हो गई किंतु अपनी नाराजगी की वजह फोन करना उचित नहीं समझा, किंतु वो अपने दिल को कैसे समझाए जो लाख अपनें मन को समझने के बाद दिल है की मानता नही वो बेचैन हो रही थी। नीलम ने अपनें फोन को उठाया और रोहन को फोन लगा दिया। नीलम का नंबर देख पहले तो रोहन ने मुस्कुराया और फोन उठाकर हैलो कहा! उधर नीलम ने फोन पर चुप रहना उचित समझा, रोहन हैलो हैलो किये जा रहा था और नीलम सिसकियां लिए जा रही थी जो रोहन को स्पष्ट सुनाई दे रही थी। तभी रोहन ने कहा अरे क्या हुआ? क्यों रो रही हो? तभी नीलम ने सिसकियां लेते हुए कहा – रोती नही तो क्या करती, उस दिन के बाद जब हम लोग रेस्टोरेंट गये थे उसके बाद एक दिन भी तुम न तो पार्क में आए न ही तुम्हारा फोन लगा। मारे चिंता के मेरा दिल तो बैठे जा रहा था।

मैं तो सोच रही थी की आखिर क्या हो गया तुझे, न तो तुम दिख रहे हो और न हीं तुम्हारा फोन लग रहा है। तेरे स्विच ऑफ ने तो मेरी परेशानी और बढ़ा दी थी। तभी रोहन ने मजाकिया अंदाज में नीलम को चारा डालते हुए कहा! आप झूठ बोल रही है आप का दिल तो मेरे पास है फिर दिल बैठने का सवाल ही नही उठता। उसे मैं सहेज कर रखा हूं जिसे कोई भी बला छु नही सकती।तभी नीलम ने हंसते हुए कहा -बात मत बनाइए आप हमसे कब मिल रहे है ये बताइए! रोहन का तीर निशाने पर लगा था। पहले तो रोहन को लगा था की मेरे मजाक को नीलम अन्यथा ना ले, किंतु ऐसा नहीं हुआ मछली पूरा चारा खा चुकी थी और रोहन खुशी खुशी नीलम से मिलने के लिए हां कह दिया। आज दोपहर का खाना दोनों बाहर ही खाने वाले थे इस लिए रोहन ने नीलम को तैयार हो जाने के लिए कहा! नीलम खुशी खुशी तैयार होकर पार्क के मुहाने पर खड़ी होकर रोहन का इंतजार करने लगी।

तभी एक चमचमाती हुई कार नीलम के पास आकर रूकी। रोहन ने तुरंत ड्राइवर की सीट छोड़कर नीलम के स्वागत में खुद कार का दरवाजा खोला और सम्मान नीलम को अंदर बैठने का आग्रह किया। यह सम्मान देख कर नीलम के दिल में रोहन के प्रति और सम्मान बढ़ गया था और तभी रोहन ने नीलम से कहा -आप बुरा ना मानो तो पहले हम लोग करोल बाग हनुमान मंदिर चलें क्योंकि आज मंगलवार है, मेरी मां कहती थी की कलयुग में हनुमान जी ही है जो सबकी रक्षा और मनोकामना पूरी करते है। ऐसे भी मेरी मनोकामना आज पूरी हो गई है तुम्हे पाकर। मुझे तुम्हारी जैसी लड़की की ही तलाश थी जिसके बंधन में मैं हमेशा हमेशा के लिए बंध सकूं। तभी नीलम ने अपनी हल्की हाथों से रोहन के सीने पर धक्का देकर कहा “पगला” अभी से ही कल्पना में उड़ान भरने लगा है। क्या पता मेरे घर वाले मानेंगे की नही, मेरे यहां जाति बिरादरी बहुत मायने रखती है तभी रोहन ने भी अपने बातों में उलझाकर नीलम से कहा मेरे यहां भी तो यही कहानी है।

मेरे घर वाले भी जाति बिरादरी को लेकर बहुत सख़्त है मगर क्या किया जाए अपना भी तो दिल है इसे अपनों से कैसे रुसवा किया जाए। अपनी भी तो जिंदगी है, खैर जो भी हो बजरंगबली ने चाहा तो हम दोनों जरूर एक हो जाएंगे ऐसे भी मैं पापा मम्मी को मना लूंगी, वो लोग मेरी बातों पर पूरा विश्वास करते है ऐसे भी तुम कोई मुस्लिम तो हो नहीं जो फर्क पड़ेगा, तभी रोहन ने कहा! क्यों अगर मैं मुस्लिम होता तो तुम मुझसे प्यार नही करती? क्या प्यार में भी जाति धर्म मायने रखती है। तभी नीलम ने कहा बिल्कुल हमें हमारे धर्म से बहुत प्यार है जो पूरे विश्व के कल्याण का भाव रखता है जहां हर धर्म का आदर होता है किंतु….…! तभी बातों को काटते हुए रोहन ने नीलम से कहा, बहुत बात हो गई एक तरफ जहां ईश्वर पर विश्वास है वहीं दूसरी तरफ ये बेकार की बातें, जो होगा बजरंगबली की कृपा से सब ठीक होगा और रोहन की गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगी। नीलम को आज रोहन के साथ गाड़ी में सफर करना बहुत अच्छा लग रहा था वो कल्पना में ऊंची उड़ान भरनें लगी थी।

कुछ क्षण बाद रोहन की गाड़ी करोलबाग मंदिर के पास जाकर रुकी और दोनों गाड़ी पार्किंग में लगाकर मंदिर के प्रांगण में प्रवेश कर गये। दोनों के हाथ में धूप बत्ती फूल और प्रसाद थे। रोहन लाइन में आगे आगे चल रहा था और नीलम ठीक उसके पीछे पीछे चल रही थी। तभी पंडित जी ने रोहन के हाथ से फूल प्रसाद लेकर कहा! बेटा तुम्हारा नाम और गोत्र क्या है तभी रोहन ने कहा मेरा नाम रोहन है और मेरा गोत्र कश्यप है। रोहन पहले से ही अपनें आका से सारी ट्रेनिंग ले रखा था रोहन को एक-एक बिंदु पर सजग किया गया था। तभी नीलम भी अपनें फूल प्रसाद को पंडित को सौपते हुए कहा मेरा नाम नीलम है और गोत्र भारद्वाज,पंडित जी ने दोनों को तिलक लगाया और प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया। रोहन ने 500 रूपये का एक नोट पंडित जी को देकर प्रणाम किया तभी पंडित जी ने कहा आप दोनों की जोड़ी बनी रहे और दोनों ने अलग अलग हट कर प्रसाद ग्रहण किया। रोहन नीलम के सामने ऐसे जता रहा था जैसे वो बहुत बड़ा धार्मिक हो।

इधर नीलम भी रोहन को सद्पात्र के रूप में हीं देख रही थी। वहां से निकलने के बाद दोनों ने एक रेस्टोरेंट में भोजन किया और एक दूसरे से पुनः मिलने का वादा किया। यह सिलसिला जारी रहा अब नीलम का पढ़ाई में मन नहीं लगता। वो रोहन के ख़्वाब में डूबी रहती थी। अब समय आ गया था जब रोहन ने एक दिन नीलम को शादी के बंधन में बंधने का प्रस्ताव दिया। पहले तो बिना मां बाप के रजामंदी के इतना बड़ा फैसला नीलम सोच कर कांप गई। तभी रोहन ने नीलम के मनोभाव को भांपते हुए कहा! तुम चिंता ना करो मैं भी तेरे साथ शादी करके अपने घर नही ले जाऊंगा क्योंकि मेरे पिताजी भी इन सब मामलों में काफी सख़्त है, मैं चाहता हूं तुम्हारे साथ मैं अपना अलग दुनियां बसाऊं जहां हम तुम और केवल मेरे बच्चे हों। यह सुन कर नीलम रोहन के सीने से चिपक गई उसे यह ख्याल नही रहा की उन दोनों को तमाम लोग देख रहे है।

कुछ क्षण बाद दोनों अपनें अपनें घर पहुंच गए। फिर एक बार समय निकलते चला गया और एक दिन रोहन और नीलम ने मंदिर जाकर शादी के बंधन में बंध गए। इधर जब भी नीलम के पिता यश बाबू का फोन आता तो नीलम ये बतलाती की उसकी तैयारी ठीक चल रही है वो हर हालत में यूपीएससी की परीक्षा पास कर लेगी और यश बाबू खुश हो जाते। अब नीलम और रोहन साथ साथ रहने लगे और बहुत जल्द नीलम मां बनने वाली थी। नीलम को अब ये लग रहा था की ये हकीकत अब उसे अपनें मां बाप को बता देनी चाहिए किंतु जब भी वो ये बात बताना चाहती डर से कांप जाती। किंतु कब तक वो ऐसे हीं डरती इस लिए नीलम ने अपनें मां को ये सारी हकीकत बता दी। उसने यह भी बता दिया की वो आठ महीने के पेट से है। ये बातें जब नीलम के मां को पता चली तो उसे तो पहले विश्वास ही नहीं हो रहा था उसने कभी सोचा नहीं था की एक सभ्य और मां बाप की आज्ञाकारी बेटी ऐसा करेगी वो सर पकड़ कर बैठ गई।

अब तो कुछ किया भी नही जा सकता था क्योंकि एक महीने बाद वो अपनें बच्चे को जन्म देने वाली थी। ये घटना जब नीलम के मां ने यश बाबू को बतलाया तो वो इस सदमे को सहन न कर सके और हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई।पिता के मृत्यु की खबर जब नीलम को मिली तो वो तड़प कर रह गई वो लोक लज्जा और मुहल्ले वालों की वजह से अपनें बाप का दर्शन भी नही कर सकी। नीलम की मां लोगों की सहयोग से यश बाबू का अंतिम संस्कार करवाया। अब तो मुहल्ले के लोग आपस में ये कानाफूसी करनें लगे थे की नीलम कौन सी पढ़ाई करने लगी है की अपनें पिता के अंतिम दर्शन के लिए भी नही आई। इधर नीलम की मां इस इंटरनेट की दुनियां में झूठ भी नही बोल सकती की नीलम की परीक्षा है क्योंकि गूगल पर हर सवाल का जबाव रहता है। यश बाबू के मृत्यु के बाद नीलम की मां बिल्कुल अकेली हो गई। इधर नीलम को भी मां की चिंता सताने लगी अतः उसने मां को दिल्ली बुलाना ही ठीक समझा।

कुछ दिन बाद नीलम की मां नीलम के यहां चली गई। तब तक नीलम ने एक पुत्र को जन्म दे दिया था। बच्चे की देखरेख नीलम की मां करती और मां की वजह से नीलम को बहुत मदद हो जाती। अब तक नीलम का बेटा एक साल का हो गया था और सब ठीक ठाक चल रहा था।एक दिन नीलम फेस बुक खंगाल रही थी तभी नीलम की नजर रोहन के एक फैमली ग्रुप फोटो पर पड़ी। लोग कहते है न झूठ को जितना सच बनाया जाए किंतु वो एक दिन अपने आप को उजागर कर ही देता है। रोहन उस ग्रुप में टोपी पहने अपने परिवार के साथ नजर आ रहा था। यह देख कर कुछ क्षण के लिए नीलम के पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उसे एक बार में समझ आ गया की मेरे साथ धोखा हुआ है। करने को कुछ नही था अब तक वो एक बच्चे की मां बन गई थी। उसकी वजह उसके पिता की मृत्यु भी हो गई थी। वो बस रोहन के आने का इंतजार कर रही थी वो ये सारी घटना अपनें मां को बता रही थी।

उसके मां को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने दिनों से साथ में रहने वाला वो इंसान एक झूठा फरेब निकलेगा। इधर नीलम बार-बार घड़ी देख रही थी। शाम होने को थे तभी रोहन घर पहुंचा। उसे देख कर नीलम बोल रही थी बोलो अनवर आज का दिन कैसे गुजरा। रोहन अपना असली नाम नीलम के मुंह से सुनकर चौक गया, तभी नीलम ने कहा चौक गये न अनवर, मेरे पिताजी हमेशा कहते थे बेटी किसी अधम अछूत से शादी कर लेना किंतु मलेछों से सावधान रहना, ये छलिया होते है सब। आज मैं अपनें जिंदगी से हार गई, अब तो मुझे जिंदा रहने का भी मन नहीं कर रहा है। एक फरेबी के साथ जिन्होंने झूठ बोल कर मेरे विश्वास को तोड़ा, हिंदू होने का नाटक कर इतने दिनों तक मुझे भोगता रहा। नीलम चिल्ला रही थी, इधर रोहन बहुत समझाने की कोशिश कर रहा था किंतु नीलम चिल्लाए जा रही थी। इधर नीलम के मां के भी समझ में नही आ रहा था की वो नीलम को क्या कह कर समझाये। वो बुत बन कर एक कोने में अपनें किस्मत को कोस रही थी।

आगे की जिंदगी मां बेटी की कैसे चलेगी सोच रही थी। तभी रोहन ने अपना असली रूप दिखाते हुए नीलम को थप्पड़ पर थप्पड़ जड़े जा रहा था और नीलम जैसे कटे हुए पंख को लेकर किसी लाचार पंक्षी की तरह छटपटा रही थी। आज का यह रोहन का रूप उन तमाम हिंदू लड़कियों के लिए एक सबक था जो चंद झूठे प्यार के चक्कर में पड़ कर मां बाप भाई बहन के रिश्ते को ठुकराकर दलदल में फंस जाती है।किंतु नीलम ऐसी नही थी जो सहजता से इस दरिंदे को छोड़ देती, उसने रोते-रोते अपनें मन में प्रतिज्ञा कर ली थी कि मैं कटनें वाली लड़कियों में से नही हूं मैंने रोहन जैसे हिंदू लड़के के साथ विवाह की हूं अगर यह लव जिहाद की वजह से हमसे शादी किया है तो ये इसकी भूल थी। इतना होने के बाद रोहन बाहर निकल कर चला गया और रात हो गई थी किंतु रोहन घर की नहीं लौटा। फिर भी नीलम ने उसकी कोई सुध नहीं ली।

नीलम अपनें मां से बोल रही थी मां तुम चिंता मत करो! मेरा नाम मेरे पापा ने नीलम रखा है, जिसके ऊपर मैं ढल जाती हूं वो मालामाल हो जाता है और जिससे मैं मुंह मोड़ लेती हूं वो बर्बाद हो जाता है। यह रोहन उर्फ अनवर अब मेरे हाथ से नहीं बचेगा। मैं इसे सबक जरूर सिखाऊंगी। दूसरे दिन रोहन घर लौट आया था वो अपने किये पर शर्मिंदा होने का नाटक कर रहा था। ऐसे भी नीलम को रोहन से कोई हमदर्दी नही रह गई थी। नीलम के सामने रोहन गिड़गिड़ा रहा था। अब नीलम को लग गया था की इस झूठे के साथ झूठा बन कर ही बदला लेना है वो अपनें आप को अबला की श्रेणी से दूर रख कर रोहन को माफ़ कर देने का नाटक कर रही थी और रोहन खुश हो गया था। किंतु नीलम के मन और दिल की आग अंदर ही अंदर धधक रही थी।

इधर ये सारी घटना रोहन अपनें सरगना जलालू शेख को फोन पर बता दिया था की नीलम सारे सच्चाई को जान गई है, तभी शेख जलालू ने कहा सब अल्लाह की मर्जी है, एक काम करो अब तो तुम एक बच्चे का बाप भी बन गए हो, अब चिंता नही हमारा मिशन निकाह से एक बच्चे के जन्म देने तक होता है। अब तुझे दूसरी लौंडिया को ठीक करनी है, अब तुम्हारे हक के 50 हजार रुपए मिलेंगे जिसे लेकर तुम अपनें बीबी के साथ घर लौटोगे। किंतु एक बात है चाचा जान मैं घर कैसे लौट सकता हूं। हमारे बीबी के साथ उसकी मां भी एक साल से मेरे साथ ही है क्योंकि अपनें बेटी के शादी की खबर सुनकर उसके बाप को भी हार्ट अटैक आ गया था और बेचारा मारा गया।तभी जलालू शेख ने हांस कर कहा तब तो और बढ़िया, तुम्हारे अब्बा को भी एक बीबी मिल जायेगी और तुझे तो मिल ही गई है। फिर दोनों ठहाका मार कर हंसने लगे थे। ये सारी बातें छुप कर नीलम सुन रही थी और वो घृणा से कांप रही थी।

अगली सुबह रोहन को 50 हजार रूपए अंतिम क़िस्त के रूप में मिल गए थे और दूसरी लड़की को ढूंढने को कहा गया था। इधर नीलम अपने मुहल्ले के एक डॉन के घर पहुंची थी और वहां पहुंच कर वो अपनी आप बीती उस डॉन को बताई की किस तरह से उसके जिंदगी से खेला गया और खेला जा रहा है। इन तमाम बातों को सुनने के बाद वो उस डॉन से मदद के रूप में एक पिस्टल और कुछ कारतूस देने का आग्रह किया और ऐसा ही हुआ। अब नीलम अपनें मिशन को पूरा करने में लग गई थी। क्योंकि वो औरों की तरह नही थी।रोहन को जलालू शेख की बात भा गई थी वो कब तक अपनें घर को छोड़ कर किसी और के पास रहता, बस वो मौके की तलाश में था की नीलम का मिज़ाज कब ठीक रहे और वो अपनें प्रस्ताव को उसके सामने रखे। इधर नीलम ने अपनें मां को वृद्धा आश्रम में रहने का प्रस्ताव दे दिया था। यह सुन कर उसकी मां फिर एक बार टूट चुकी थी किंतु नीलम भी ऐसा नहीं चाह रही थी की उसकी मां उसकी नजरों से दूर रहे, मगर वो क्या कर सकती थी।

मां उसके मिशन में एक मुसीबत बन रही थी। बेटी के इस बात को सुन कर नीलम की मां काफी मर्माहत थी अतः एक मिनट भी अब वो नीलम के साथ नही रहना चाह रही थी और वो अपना सामान लेकर वृद्धा आश्रम चल पड़ी थी। मां के जाने के बाद नीलम बहुत रोई किंतु अपने आप को कमजोर नही होने दिया। रोहन जब तक लौट कर आता नीलम अपना आंसू पोंछ कर सहज हो गई थी। वो हमेशा बदले की भावना से तैयार रहती थी उसे बस मौके की तलाश थी। नीलम के मां को आश्रम गए हुए एक सप्ताह हो गये थे, मगर रोहन को मां के चले जानें का थोड़ा सा भी अफसोस नहीं हुआ था।आज वो नीलम की बाहर ले जानें को तैयार था और नीलम भी जाने की स्वीकृति दे चुकी थी किंतु अब वह एक एक कदम फूंक फूंक कर चल रही थी। वो रोहन के साथ जाते समय अपनी पर्स में अपना लोडेड रिवाल्वर लेना नही भूली क्योंकि अब रोहन उन तमाम मलेछों के जैसा ही था।

रोहन नीलम और उसका एक साल का बेटा ये तीनों जलालू शेख के पास जा पहुंचे जलालू शेख का घर और हाव भाव देख कर नीलम समझ चुकी थी की असली मास्टर माइंड यही है। नीलम का स्वागत बहुत ही अच्छी तरह हुआ। जलालू शेख नीलम को अपनी बातों के प्रभाव में लेना चाह रहा था। बातों का सिलसिला शुरू था, जलालू शेख ने नीलम से कहा! बेटी अनवर ने बहुत बड़ी गलती की है की इसने अपनें धर्म की छुपाकर तुमसे निकाह किया। किंतु प्यार में धर्म हमेशा हारा है और प्यार की जीत हुई है और तुम्हारा भी प्यार जीता है। असमंजस किस बात की है अब तो अनवर तुझे अपनें घर भी ले जानें को तैयार है। सुने है तुम अपनें मां को वृद्धाआश्रम भेज चुकी हो जो जायज़ नहीं है। उसका भी रास्ता है बस तुम इस्लाम स्वीकार कर फिर एक बार निकाह कर लो, रही बात तुम्हारे मां की तो अनवर की मां भी इस दुनियां में नही है। हम चाहते है की तुम्हारे मां का भी निकाह अनवर के अब्बा से हो जाए और उन्हें भी फिर से एक जीवन साथी मिल जाय।

बस एक साथ तुम चारो निकाह के बंधन में बंध जाओ। यह सुनकर नीलम का खून अंदर ही अंदर खौल रहा था वो बोल रही थी चाचा जी मैंने तो हिंदू से शादी की है और अगर धर्म बदलेगा तो रोहन, ये हिंदू बनेगा नही तो! नही तो क्या बेटा! क्या कर लोगी तुम, तुझे नही मालूम की मेरा हाथ कितना लंबा है। मेरे एक इशारे पर तुम भी किसी गटर में कटी हुई लाश के रूप में मिलेगी जलालु शेख बोल रहा था। ये तुम्हारी भूल है जलालु शेख मैं टुकड़ों में कटने वाली नही हूं मेरे रग में किसी कट्टर हिंदू का खून है अगर ये तुम्हारा अनवर आज ही तुम्हारे सामने हिंदू होने को तैयार नहीं होता है तो ये टुकड़ों में कटेगा और केवल यही नहीं इसका सपोला भी जो बड़ा होकर ना जाने कितने भोले भाले लड़कियों को डसेगा। लोग कहते है माता कुमाता नही होती किंतु यह मां क्या करेगी जिसने एक सपोले को जन्म दिया है। तभी जलालू शेख ने कहा अनवर इसके जैसी बहुत मिलेगी काट दो इसके जुबान को बहुत चल रही है इसकी जुबान।

तब तक नीलम हाथ में रिवाल्वर लेकर दरवाजे को कैद कर चुकी थी जिससे कोई भाग ना पाए तभी रोहन आगे की तरफ बढ़ा था और नीलम ने पहली गोली अपनें एक साल के बच्चे को मार दी थी और वो वहीं ढेर हो गया था। अचानक ये वाकया देख जलालु और रोहन घबड़ा गए थे तभी नीलम ने कहा सपोला का काम तमाम हो गया अब सांप की बारी है और दूसरी गोली रोहन को लगी और वो जमीन पर गिर कर छटपटाने लगा और फिर एक गोली में शांत हो गया। पूरा फर्स खून से भर गया था। तभी नीलम जलालु शेख से कह रही थी घबराओ मत जलालू शेख तुझे मैं धीरे धीरे तड़पा कर मारूंगी। तुम्हारे वजह से ना जानें कितनों का घर बर्बाद हुआ होगा और कितने लड़कियों की जान गई होगी। कितने परिवार लूटे होंगे न जाने कितने पिता इस दर्द को सह नहीं पाए होंगे। जलालू हाथ जोड़ रहा था मुझे छोड़ दो बेटी मुझे माफ़ कर दो।

छी: अरे तूं इतना गिरा हुआ इंसान है की तुझे छोड़ने से मुझे पाप लगेगा तूने तो मेरे विधवा मां को भी नही छोड़ा अनवर के बाप को सौप रहा था इस्लाम की दुहाई देकर, अब तू जा तेरे पाप का घड़ा अब बिल्कुल भर चुका है अब मैं तुझे आजाद करती हूं और नीलम पूरे के पूरे गोली जलालु के सीने में उतार दी और बाहर निकल गई। सब इतना जल्दी हुआ की जलालु शेख के लोगों को भी कानों कान ये खबर न लगी और नीलम रोहन के पॉकेट से गाड़ी की चाभी निकाली और चलती बनी। नीलम की गाड़ी सीधे पुलिस थाने में पहुंची और अपने आप को पुलिस के आगे आत्म समर्पण कर दिया। उसी शाम मीडिया चैनल पर यह खबर चल रही थी की दिल्ली में लव जिहाद का मास्टर माइंड जलालु शेख और उसके गुर्गे अनवर उर्फ रोहन की हत्या एक पीड़िता ने की। इस जिहाद का दर्द इतना गहरा था की पीड़िता ने अपनें एक साल के बच्चे को सपोला कह कर गोली मारा और उसे भी नही छोड़ा।

ये खबर वृद्धा आश्रम में नीलम की मां टीवी पर देख रही थी उसे अपनें बेटी के इस कारनामें पर गर्व हो रहा था और मीडिया के सामने नीलम बोल रही थी भाई एवम बहनों लव जिहाद के दलदल में कोई भी लड़की नही फंसना नही चाहती किंतु ये आसुरी ताकत अपना भेष बदल कर धोखा से फसाते है। उन्हें तब तक प्यार से रखा जाता है जब तक वो एक बच्चे की मां न बन जाय और बच्चे के जन्म के बाद इनका असली चेहरा देखने को मिलता है। कुछ तो बच्चे का चेहरा देख कर पूरा जीवन घुट घूंट कर जीती है तो कुछ बगावत कर के गटर, फ्रिज अथवा सूटकेश में मिलती है किंतु मैं न कटी ना बटी, मैंने अपना परिचय दिया मैं अपनें वीरांगनाओं को याद किया जिसने इन मलेक्षों की वजह जौहर को चुना किंतु यहां भी मैंने अपने आप को खत्म नहीं किया बल्कि इन दरिंदों का अंत किया। मैंने भी रोहन से विवाह किया जो अपने ललाट पर तिलक और हाथ में कलावा का छलावा करता रहा। तभी पुलिस वाले मीडिया वालों को हटाकर नीलम को गाड़ी से लेकर चले गए थे। कुछ दिन बाद कोर्ट बिना किसी गवाह के सजा से नीलम को मुक्त कर दिया था और नीलम पुनः अपनें मां के साथ रहकर अपनी पढ़ाई शुरू कर दी थी।और वो अपनें पिता के सपनो को साकार करते हुए आईपीएस बन गई थी।

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