कोलकाता: 7 नवम्बर 2025 को एनवायरनमेंट कंज़र्वेशन सोसायटी (SwitchON Foundation) और बंगाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BCC&I) के सहयोग से “Decarbonizing Steel: Pathways to a Low-Carbon Future” नाम से एक बहु-हितधारक (multi-stakeholder) बैठक का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में इस्पात उद्योग के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, वित्तीय संस्थान, तकनीकी विशेषज्ञ और MSME इस्पात उत्पादक शामिल हुए। सभी ने मिलकर भारत के सेकेंडरी स्टील सेक्टर को डिकार्बोनाइज करने की रणनीतियों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान भारत के इस्पात क्षेत्र पर दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की गईं – “Low-Carbon Steel Sector: Perspectives on Interventions & Challenges” और “Decarbonisation Challenges and Opportunities in India’s Secondary Steel Sector: A Stakeholder Perspective”। इस बैठक का उद्देश्य भारत के इस्पात उद्योग को अधिक सतत और न्यायसंगत बनाने के रास्ते पर आगे बढ़ाना है।

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है, 2030 तक 300 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य रखते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी और साथ ही ग्रीन स्टील के वैश्विक बाजार में एक बड़ी संभावना के सामने खड़ा है। इस दिशा में सरकार, उद्योग और सिविल सोसाइटी को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि यह बदलाव न्यायसंगत और सतत हो सके।
बैठक में इस्पात उद्योग को सतत बनाने के लिए कई अहम सुझाव सामने आए – जैसे कम ब्याज वाले लोन, कार्बन क्रेडिट का उपयोग, MSME इकाइयों को वित्तीय संस्थानों और कार्बन मार्केट से जोड़ना। इसके अलावा, तकनीकी दृष्टि से भी कई नए अवसरों पर चर्चा हुई जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, बेस्ट अवेलेबल टेक्नोलॉजी (BAT), और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपाय।
MSME इकाइयों की क्षमता बढ़ाने और तकनीकी सहायता देने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। बाजार निर्माण पर भी चर्चा हुई ताकि भविष्य में “ग्रीन स्टील” या सतत इस्पात की मांग और आपूर्ति को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यक्रम में अनुपम राय, वरिष्ठ सलाहकार, SwitchON Foundation ने कहा “हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसी तकनीकें धीरे-धीरे विकसित हो रही हैं, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा, स्क्रैप का उपयोग और ऊर्जा दक्षता जैसी पहलें अभी से इस्पात उद्योग में कार्बन कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं और ये किफायती भी हैं।”
सुप्रियो घोष, अध्यक्ष, नेशनल MSME कमिटी, BCC&I ने कहा, “सेकेंडरी स्टील उत्पादक भारत के इस्पात उद्योग की रीढ़ हैं। अगर हमें हरित भविष्य की ओर बढ़ना है, तो MSME इकाइयों को सही तकनीकी मार्गदर्शन और सुलभ वित्तीय सहायता देना बेहद जरूरी है। तभी यह क्षेत्र सच्चे अर्थों में प्रतिस्पर्धी और समावेशी बन पाएगा।”
कार्यक्रम के दौरान SwitchON Foundation और EarthON Foundation ने मिलकर राजीव सिन्हा फाउंडेशन के साथ “Greenovation Challenge on Green Steel” की घोषणा की।
इस पहल का उद्देश्य इस्पात उद्योग में कार्बन कम करने के लिए नवाचार और पायलट-तैयार समाधानों को पहचानना और समर्थन देना है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, सर्कुलर इकॉनमी और ऊर्जा दक्षता से जुड़ी तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह कार्यक्रम भारत के औद्योगिक विकास और जलवायु लक्ष्यों को साथ लेकर चलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। बातचीत में नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ग्रीन फाइनेंस और सर्कुलर इकॉनमी की अहम भूमिका पर भी जोर दिया गया।
बैठक में जारी की गई रिपोर्टें आने वाले समय में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शिक्षाविदों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में काम करेंगी, ताकि भारत के इस्पात उद्योग का भविष्य और अधिक सतत और कम-कार्बन हो सके।
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