कोलकाता। मेरिट लिस्ट के आधार पर पारदर्शी तरीके से भर्ती की मांग को लेकर कोलकाता में स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों का धरना 500 दिन पूरा कर लिया। वाम मोर्चा के नेताओं ने विशाल जुलूस के साथ धरना मंच में शामिल होकर नौकरी चाहने वालों के आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई। कोलकाता के धर्मतला में लगातार 500 दिनों से अभ्यर्थी गांधी की मूर्ति के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर होने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं की गई। इसके लिए वाम मोर्चा नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने आंदोलनकारियों को नौकरी दिलाने के लिए प्रभावी समाधान की भी मांग की। सियालदह, पार्क सर्कस और हावड़ा से निकाले गए वाम समर्थकों का तीन विशाल जुलूस धर्मतला में अभ्यर्थियों के धरना स्थल पर पहुंचा। वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमन बसु, पोलित ब्यूरो सदस्य सूर्यकांत मिश्रा और अन्य वामपंथी नेता भी मंच पर मौजूद थे। इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम, सीपीआईएम के केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती, सीपीआई के नेता प्रबीर देव, मधुचंद देव, फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता हफिज आलम सैरानी और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के नेता इंद्रजीत घोष और अन्य वामपंथी नेताओं ने इस जुलूस में हिस्सा लिया।

बारिश के बावजूद बुधवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुलूस में शामिल हुए। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नारा लगाते हुए कहा, “इन सभी भ्रष्टाचारों के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं।” उन्होंने बनर्जी के इस्तीफे और सभी भ्रष्ट तृणमूल नेताओं को जल्द जेल भेजने की मांग की। कोलकाता की सड़कों पर ”चोर, चोर” के नारे गूंजे तो कहीं राहगीर भी इस नारेबाजी में शामिल हो गए। धरना मंच से सभा को संबोधित करते हुए वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमन बोस ने कहा, “जो राज्य में शिक्षा मंत्री थे वह अब उद्योग मंत्री हैं। जैसे कि शिक्षा विभाग में कोई काम नहीं था और या तो उद्योग विभाग में भी कोई काम नहीं।

कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। इतने अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बाद भी शिक्षकों के पद खाली हैं। शिक्षकों की कमी के कारण भी कई स्कूल बंद हो गए हैं। इन सबके लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। दोषियों को सजा मिलनी
चाहिए।” सीपीआईएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा, “सभी चोरों को पकड़ा जाए और उन्हें जेल में डाला जाए। पंचायत नेता से लेकर नगर पार्षद, महापौर, विधायक, मंत्री, ममता बनर्जी, उनके भाइयों, भतीजों और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सभी चोरों को पकड़ा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने नारदा-शारदा घोटाले देखे। मुख्यमंत्री चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती हैं। उन्होंने मोदी (पीएम नरेंद्र मोदी) और अमित शाह के साथ बैठक की है। वह फिर बैठक करेंगी। हम सभी चोरों को जेलों में देखना चाहते हैं चाहे वह जनता के आंदोलन के दबाव में हो या अदालतों के दबाव में। नौकरशाह हो या मंत्री- अगर वह भ्रष्ट है, तो उसे बर्खास्त कर देना चाहिए।” उन्होंने मांग की, “तृणमूल नेताओं को पैसे देकर जिन लोगों को धोखाधड़ी से नियुक्त किया गया है, उन्हें उनकी नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए।

तृणमूल के पंचायत प्रधानों से लेकर मेयर, विधायक, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी जैसे नेता जिन्होंने अवैध संपत्ति हासिल की है उनकी संपत्ति की नीलामी हो और लूटा हुआ पैसा वापस हो”। सलीम ने पड़ोसी देश श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा, “हर गरीब को एक लाख रुपये दिए जाने चाहिए। अगर पुलिस, ईडी और सीबीआई कार्रवाई नहीं करते हैं तो आम लोग कार्रवाई करेंगे। लोग श्रीलंका की तरह आंदोलन करेंगे।” वाम मोर्चा के नेताओं ने राज्य के सभी नागरिकों से आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के साथ खड़े होने का आग्रह किया।

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