नई दिल्ली: भारतीय खेल जगत के लिए साल 2025 उतार-चढ़ाव से भरा रहा। जहां युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर देश का नाम रोशन किया,
वहीं विश्व शतरंज के सबसे बड़े सितारों में शामिल डी. गुकेश से इस साल अपेक्षित प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। साल का खेल लेखा-जोखा उम्मीद और निराशा — दोनों की कहानी कहता है।
दिव्या देशमुख ने रचा नया इतिहास
महाराष्ट्र की युवा ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख ने 2025 में भारतीय शतरंज इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। महिला और जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पदक जीते और विश्व रैंकिंग में लंबी छलांग लगाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्या की सफलता भारतीय महिला शतरंज के स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। उनके आक्रामक लेकिन संतुलित खेल ने उन्हें साल की सबसे बड़ी खोजों में शामिल कर दिया।
डी. गुकेश से उम्मीदें रहीं अधूरी
इसके उलट, 2024 में शानदार प्रदर्शन के बाद डी. गुकेश से 2025 में काफी उम्मीदें थीं। हालांकि, इस साल वह कई बड़े टूर्नामेंटों में निर्णायक मुकाबलों में लय बनाए रखने में नाकाम रहे।
विश्व रैंकिंग में उनकी स्थिति स्थिर रही, लेकिन खिताब जीतने की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि दबाव, व्यस्त शेड्यूल और निरंतर मुकाबलों का असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा।
भारतीय शतरंज के लिए मिला मिला-जुला संदेश
साल 2025 ने यह साफ कर दिया कि भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन निरंतरता और मानसिक मजबूती शीर्ष स्तर पर सफलता की कुंजी है।
दिव्या देशमुख की उपलब्धियां जहां प्रेरणा बनीं, वहीं गुकेश का संघर्ष यह याद दिलाता है कि शीर्ष स्तर पर टिके रहना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
2026 से नई उम्मीदें
साल के अंत में विशेषज्ञों और प्रशंसकों की निगाहें अब 2026 पर टिकी हैं। उम्मीद है कि गुकेश वापसी करेंगे और दिव्या देशमुख अपनी उड़ान को और ऊंचाई देंगी।
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