नई दिल्ली। यह स्थापित सत्य है कि फुटबॉल के खेल पर उपरोक्त तीन ‘एस’ के बल पर ही राज किया जा सकता है। इन तीनों में से जिसके पास एक ‘एस’ है वह अच्छा खिलाड़ी है, जिसके पास ‘दो एस’ है, वह बेहतर खिलाड़ी है और जिसके पास ‘तीनों एस’ हों, वह महान खिलाड़ी है।
1. पहला ‘एस’ यानि स्पीड थ्रिल पैदा करती है, जोश जगाती है। एड्रेनल को सुपरएक्टिव करती है। डिफेंडर को पीछे छोड़ने, काउंटर-अटैक करने और विंग-प्ले में स्पीड की निर्णायक भूमिका होती है।
लेकिन स्पीड के साथ समस्या यह है कि इसकी लाइफ बहुत कम होती है। अमूमन 5-8 वर्ष के मध्य।
2. दूसरा ‘एस’ यानि स्टैमिना खिलाड़ी को लंबे समय तक खेल में एक्टिव रखता है। मैदान में हर समय उसकी उपस्थिति दिखती रहती है। स्टैमिना मैच‑टाइम में निरंतरता देता है और पूरे सीज़न में खिलाड़ी का योगदान सुनिश्चित करता है।
पर इसकी लाइफ भी साधारणतया 10-12 वर्ष ही होती है।
3. तीसरा ‘एस’ में टेक्निकल और मानसिक गुण आते हैं। स्किल ज्यादातर नैसर्गिक होता है। हालांकि लगातार अभ्यास और प्रयास करके इस एस को औऱ निखारा जा सकता है। तकनीक, विज़न, पोजिशनिंग, निर्णय‑शक्ति, गेम‑इंटेलिजेंस, फुटबॉल IQ स्किल के घटक हैं।
इस एस की खास बात यह कि इसकी लाइफ बहुत ज्यादा होती है। कई बार तो 20-25 वर्ष तक भी बशर्ते कि पहले दोनों एस का काफी भाग खिलाड़ी में बचा रह जाये।
रोनाल्डो, स्पीड और स्टैमिना के बादशाह थे। इब्राहिमोविच को बॉडी‑कंट्रोल और स्किल में महारथ हासिल है। नेयमार के पास स्किल और फ्लेयर के साथ स्पीड का बेजोड़ संगम था। मैसी की उम्र के साथ स्पीड कम हुई है। स्टैमिना पर भी असर हुआ है पर उनके पास स्किल, विज़न और गेम‑इंटेलिजेंस का ऐसा जादुई कौशल है कि वे स्पीड और स्टैमिना की कमी खलने नहीं देते हैं ।
विनय सिंह बैस का मानना है कि खेल की अद्भुत समझ, सही समय पर सही निर्णय और भारी दबाव में भी अपनी टीम की जीत के लिए सोचना और खेलना उन्हें अति विशिष्ट, कालजयी बनाते हैं। इसीलिए तो 39 वर्ष की परिपक्व आयु में भी वह 20-25 वर्ष के जोशीले, फुर्तीले युवाओं से इक्कीस साबित हो रहे हैं।
और
उनकी गणना सर्वकालिक महान खिलाड़ियों (GOAT) में हो रही है।
विनयसिंहबैस
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