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भारत रत्न जयप्रकाश नारायण के जीवन और आदर्शों को याद करते हुए विशेष संगोष्ठी आयोजित

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। ‘वंदे मातरम् सुजलां सुपलां मलयजशीतलां शस्यश्यामलां मातरम्।’ – इस गीत के साथ हर भारतवासी का भावनात्मक संबंध जुड़ा हुआ है। पूरे देश में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर इसे विशेष रूप से मनाया जा रहा है।

पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत घाटाल-दासपुर स्थित गांधी मिशन में भारत रत्न जयप्रकाश नारायण के जीवन और उनके आदर्शों को स्मरण करते हुए एक विशेष परिचर्चा सभा आयोजित की गई।

इस चर्चा सभा के मुख्य वक्ताओं में बेलदा कॉलेज के राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक तुहिन दास, नेड़ाजोल राज कॉलेज की राजनीति विज्ञान की प्राध्यापिका राजश्री देवनाथ, प्रसिद्ध साहित्यकार, विद्यासागर पुरस्कार एवं बांग्लादेश के ‘बंगबंधु आलोकिता फजिलातुन्नेसा सम्मान’ प्राप्त रोशनारा खान, गांधी मिशन ट्रस्ट के कर्ताधर्ता नारायण भट्टाचार्य (नारायण भाई), तापस पोड़ेल और पूर्व प्रधानाध्यापक बरुण कुमार विश्वास प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

जयप्रकाश नारायण के प्रत्यक्ष अनुयायी नारायण भाई ने उनके जीवन, विचारों और संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उन पहलुओं को भी सामने रखा जो आम जनता के सामने बहुत कम जाने जाते हैं और जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। उनकी इस प्रस्तुति ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और सभी सदस्यों को गहराई से प्रेरित किया।

सभा का मुख्य आकर्षण थीं रोशनारा खान, जिनका जीवन स्वयं एक आदर्श और उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने बचपन से ही समाज में विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के प्रति होने वाले भेदभाव और उनकी सीमाओं के खिलाफ संघर्ष किया।

सामाजिक उपेक्षा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को स्थापित किया और आज उनके साहित्यिक कार्य भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में सम्मानित हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में नागरिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की महत्ता को रेखांकित किया, जिससे उपस्थित छात्र-छात्राएं अत्यंत प्रेरित हुए।

रोशनारा खान को 2022 में विद्यासागर विश्वविद्यालय का सर्वोच्च सम्मान ‘विद्यासागर सम्मान’ प्रदान किया गया था और 2024 में बांग्लादेश के ‘बंगबंधु अंतरराष्ट्रीय कविता उत्सव’ में ‘आलोकिता फजिलातुन्नेसा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

नेड़ाजोल राज कॉलेज, घाटाल कॉलेज और चाईपाट कॉलेज के अनेक छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सभा में विशेष रूप से “सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी” और “डेमोक्रेसी फॉर सिटीजन” इन दो वाक्यांशों पर चर्चा की गई। इनके अर्थ, महत्व और अंतर को समझाते हुए वक्ताओं ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का आग्रह किया।

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