IMG 20250612

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून 2025 पर विशेष…

आइए बच्चों को मजदूरी नहीं शिक्षा दिलाएं जो सामाजिक आर्थिक राजनीतिक शैक्षणिक क्षेत्रों का सशक्त उपकरण व रोजगार का अस्त्र है
बच्चे हर देश के सुनहरे भविष्य की नींव है, आइए उन्हें मजदूर नहीं शिक्षित बनाएं
भारत में बाल श्रम रोकने में श्रम विभाग, बाल संरक्षण विभाग, पुलिस, मानव तस्करी विरोधी विभाग, बाल अधिकार आयोग की सक्रियता में कमी का संज्ञान पीएम को लेना जरूरी

अधिवक्ता किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक रूप से यह देखा गया है कि अनेक व्यायसायिक संस्थानों, औद्योगिक संस्थानों, दवा उद्योग, खेत-खलियानों गृह उद्योग इत्यादि अनेक व्यवसायिक क्षेत्रों में छोटे-छोटे बच्चों से श्रम करवाया जाता है, क्योंकि उन क्षेत्रों में कामों के लिए यह छोटे-छोटे बच्चे आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और अपेक्षाकृत रोजी या मजदूरी भी इनकी कम होती है और दैनिक मजदूर के रूप में रखकर आसानी से अपना काम करवा लेते हैं। दूसरी तरफ हम अनेक चौराहों, बाजारों, हाट बाजारों, में हमने छोटे-छोटे बच्चों को अकेले या अपने माता-पिता के साथ खिलौने, खाद्य पदार्थों इत्यादि बेचते देखते रहते हैं। अनेक बड़ी या छोटे शहरों में तो ट्रैफ़िक सिग्नल, चौराहों, स्टेशनों, बूथों पर अक्सर यह छोटे बच्चे भीख मांगते, सामान बेचते, हमें दिखते रहते हैं।

यह नजारा हर छोटे बड़े शहरों के चौराहों पर आसानी से देखने को मिलता है। जबकि संयुक्त राष्ट्र बाल श्रम उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित करते हुए कहा कि 2025  तक इस प्रथा को समाप्त करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। आज इस विषय पर हम चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 12 जून 2025 को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जा रहा है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे, विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून 2025 – बच्चों को मजदूरी नहीं शिक्षा दिलाएं जो सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक क्षेत्रों का सशक्त उपकरण व रोजगार का अस्त्र है।

साथियों बात अगर हम 2025 तक बाल श्रम के सभी रूपों को समाप्त करने के लक्ष्य की करें तो, विश्व बाल श्रम निषेध दिवस, जिसे हर साल 12 जून को मनाया जाता है, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) द्वारा बाल शोषण के गंभीर मुद्दे को उजागर करने और इसे मिटाने के प्रयासों को संगठित करनेके लिए शुरू की गई एक वैश्विक पहल है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2025 और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह आइएलओ और यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए बाल श्रम पर नए वैश्विक अनुमानों और रुझानों के जारी होने के साथ मेल खाता है। यह महत्वपूर्ण डेटा वैश्विक नीतिगत बहसों का मार्गदर्शन करेगा और सतत विकास लक्ष्य 8.7 को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों को फिर से सक्रिय करेगा।

2025 तक सभी रूपों में बाल श्रम को समाप्त करने का एक लक्ष्य रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, सभी देशों को 2025 तक बाल श्रम को समाप्त करने का लक्ष्य दिया गया है। यह लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 8.7 में शामिल है, जो सभी रूपों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने का आह्वान करता है। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन बाल अधिकारों पर लगातार काम कर रहा है।

यह भी पढ़ें:  सिर्फ मालदा में मिलता है कद्दू जैसा दिखने वाला नवाबगंज बैंगन...

फांडेशन की ओर से बाल मजदूरी पर एक जानकारी दी गई है, इसमें बाल मजदूरी से संबंधित कई जानकारी दी गई है। जनगणना 2011 के डेटा के अनुसार, भारत में बाल मजदूरों की संख्या 1.01 करोड़ (10.1 मिलियन) है, इसमें से 0.560 करोड़ (5.6 मिलियन) लड़के और 0.45 करोड़ (4.5 मिलियन) लड़कियां हैं। वहीं हाल के वैश्विक अनुमान के अनुसार 2020 की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर 16 करोड़ (160 मिलियन) बच्चे- 6.300 करोड़ (63 मिलियन) लड़कियां और 9.700 करोड़ (97 मिलियन) लड़के – बाल श्रम में थे, जो दुनिया भर में सभी बच्चों में से लगभग 10 में से 1 है। भारत भर में बाल मजदूर कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों जैसे ईंट भट्टों, कालीन बुनाई, परिधान निर्माण, घरेलू सेवा, खाद्य भोजनालयों, गन्ना खेतों, मत्स्य पालन और खनन में पाए जा सकते हैं। बच्चों को यौन शोषण और बाल पोर्नोग्राफी के उत्पादन सहित कई अन्य प्रकार के शोषण का भी खतरा है।

साथियों बात अगर हम भारत में बाल श्रम को रोकने के लिए बनाए गए कानूनों की करें तो, भारत में बाल श्रम उन्मूलन के लिए, बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) जैसी नीतियां और योजनाएं शुरू की गई हैं। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 ने बाल श्रम के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत किया है।

बाल श्रम उन्मूलन के लिए की गई प्रमुख पहलें : बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986: यह अधिनियम 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी व्यवसाय में काम करने से रोकता है और 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को खतरनाक व्यवसायों में काम करने से रोकता है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: यह सभी बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान करता है, जो बाल श्रम को कम करने में मदद करता है।

राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एनसीएलपी) : यह परियोजना बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को गैर-औपचारिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, मध्याह्न भोजन, वजीफा और स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करती है, और उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा प्रणाली में शामिल करती है।

बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016: इस संशोधन के तहत, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सभी व्यवसायों में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें पारिवारिक उद्यमों में काम करना भी शामिल है।

यह भी पढ़ें:  अभिषेक बनर्जी के बयान पर बोले दिलीप घोष, असली फिल्म सीबीआई और ईडी दिखा रही

बालश्रम से संबंधित मामलों पर राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन प्राधिकरण (एनसीएलए) का गठन : यह प्राधिकरण बाल श्रम को खत्म करने में मदद करता है, और बाल श्रम से संबंधित मामलों पर कानूनी कार्रवाई करता है।

साथियों बात अगर हम भारत की करें तो भारत में भी अनेक बाल श्रमिक हैं और बाल श्रमिकों की तेजी से संख्या भी बढ़ रही है हालांकि केंद्र और राज्य सरकारों ने इसके खिलाफ कड़े कदम उठाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है परंतु बाल श्रम रोकने में श्रम विभाग, बाल संरक्षण विभाग, पोलिस, मानव तस्करी विरोधी विभाग, बाल अधिकार आयोग की सक्रियता में कमी का संज्ञान पीएम को लेना जरूरी। देखा जाए तो बाल श्रमिक निम्नलिखित रुप से काम करते हैं?बाल मज़दूर – वे बच्चे जो कारखानों, कार्यशालाओं, प्रतिष्ठानों, खानों और घरेलू श्रम जैसे सेवा क्षेत्र में मजदूरी या बिना मजदूरी में काम कर रहे हैं। गली मोहल्ले के बच्चे, कूड़ा बीनने वाले, अखबार और फेरी लगाने वाले और भीख मांगने वाले। बंधुआ बच्चे, वे बच्चे जिन्हें या तो उनके माता-पिता ने पैसों की ख़ातिर गिरवी रखा है या जो कर्ज़ को चुकाने के चलने मज़बूरन काम कर रहे हैं।

वर्किंग चिल्ड्रन – वे बच्चे जो कृषि में और घर-गृहस्थी के काम में पारिवारिक श्रम का हिस्सा हैं।यौन शोषण के लिए इस्तेमाल किए गए बच्चे – हजारों बालिक बच्चे और नाबालिक लड़कियां यौन शोषण की जद में हैं। घरेलू गतिविधियों में लगे बच्चे – घरेलू सहायता के रूप में काम। इसमें लड़कियों का शोषण सबसे ज़्यादा है – बच्चे छोटे भाई-बहनों की देखभाल, खाना पकाने, साफ-सफाई और ऐसी अन्य घरेलू गतिविधियों में लगे हुए हैं। हालांकि इन गतिविधियों को रोकने के लिए भारत में अनेक कानून कायदे बने हैं जैसे कि, खदान अधिनियम 1952-18 साल से कम आयु वाले बच्चों को खदानों में काम करने पर प्रतिबन्ध लगाता है परंतु मेरा मानना है कि संबंधित विभाग शायद इस और ध्यान नहीं दे पा रहा है।

साथियों बात अगर हम हर साल बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की करें तो, दुनिया भर में हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसको मनाए जाने का उद्देश्य 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम ना कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने और आगे बढ़ने के लिए जागरूक करना है। भारत में बालश्रम की समस्या दशकों से प्रचलित है। भारत सरकार ने बालश्रम की समस्या को समाप्त करने कदम उठाए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है। भारत की केंद्र सरकार ने 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित कर दिया। इस अधिनियम के अनुसार बालश्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। इस समिति की सिफारिश के अनुसार, खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषिद्ध है। 1987 में राष्ट्रीय बालश्रम नीति बनाई गई थी।

यह भी पढ़ें:  चंद्रयान-3 की सफलता में बंगाल के वैज्ञानिकों की भी बड़ी भूमिका
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी : संकलनकर्ता, लेखक, कवि, स्तंभकार, चिंतक, कानून लेखक, कर विशेषज्ञ

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून 2025-आओ बच्चों को मज़दूरी नहीं शिक्षा दिलाएं जो सामाजिक आर्थिक राजनीतिक शैक्षणिक क्षेत्रों का सशक्त उपकरण व रोजगार का अस्त्र है, बच्चे हर देश के सुनहरे भविष्य की नींव है, आइए उन्हें मजदूर नहीं शिक्षित बनाएं, भारत में बाल श्रम रोकने में श्रम विभाग, बाल संरक्षण विभाग, पुलिस, मानव तस्करी विरोधी विभाग, बाल अधिकार आयोग की सक्रियता में कमी का संज्ञान पीएम को लेना जरूरी है।

(स्पष्टीकरण : उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। यह जरूरी नहीं है कि कोलकाता हिंदी न्यूज डॉट कॉम इससे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है।)

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Kolkata News Desk Avatar

Kolkata News Desk

News Editor MA

कोलकाता और पश्चिम बंगाल की ब्रेकिंग न्यूज, स्थानीय घटनाओं, खेल, राजनीति और सामाजिक मुद्दों की खबरों को कवर करता है। हमारी डेस्क टीम 24×7 सक्रिय रहकर पाठकों को ताज़ा और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराती है।

Areas of Expertise: Sports, Politics & West Bengal
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *