पारो शैवलिनी, चित्तरंजन, पश्चिम बंगाल । आज 3 जून है। आज साईकिल का दिन है। आज साईकिल चलाने का दिन है। आज साईकिल चलाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का दिन है। साईकिल चलाना व्यायाम करने और परिवहन पर पैसे बचाने का एक शानदार तरीका है। साईकिल चलाना बच्चों और वयस्कों समेत महिलाओं के लिए भी उपयोगी है क्योंकि साईकिल मोटर साइकिल और कार से ना सिर्फ सस्ती पड़ती है बल्कि यह विश्वसनीय है अपितु स्वास्थ और पर्यावरण दोनों के अनुकूल है।

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पारो शैवलिनी कवि

जानकारी अनुसार गत् पांच वर्ष पूर्व 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक तौर पर न्यूयार्क में पहली दफा इस दिवस को जश्न के रूप में मना कर लोगों के बीच साईकिल चलाने के फायदे को बताने के लिये जागरूकता फैलाने की शुरूआत की थी। तबसे आज तकरीबन 80 से भी ज्यादा देशों में 3 जून को विश्व साईकिल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने के पीछे दैनिक जीवन में साईकिल के इस्तेमाल को बढावा देने और इसे लोकप्रिय बनाना है। इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि साईकिल चलाना शारीरिक स्वास्थय के लिए बेहतर तो है ही साथ ही पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह लाभदायक है क्योंकि इससे पर्यावरण कभी प्रदुषित नहीं होता।

आज के वैश्विक युग में मोटर साइकिल और कार चलाना शान की बात ही नहीं इस भागम-भाग जिन्दगी में यह लोगों की जरूरत भी है। बावजूद इसके साईकिल की सवारी जहां पैसे की बचत कराती है। वहीं इसके लिए किसी भी तरह के लाईसेंस की जरूरत भी नहीं होती। अगर आज के परिप्रेक्ष्य में देखा जाय तो भारत जैसे देश के लिए यह और भी बहुत ज्यादा अनुकूल है क्योंकि भारत में सड़क हादसे बहुत ज्यादा होते हैं जिसमें मोटर साइकिल, स्कूटी और चार पहिये वाहन की तेज रफ्तार की वजह शामिल होती है। एक समय था जब साईकिल की सवारी को लोकप्रिय बनाने के लिए साईकिल रेस जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थी। आज भी इसकी जरूरत है।

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