खड़गपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे दुकानदार कल्याण समिति ने मेदिनीपुर से रामराजातला स्टेशनों के बीच रेलवे भूमि पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे छोटे दुकानदारों और झुग्गीवासियों की समस्याओं को लेकर दक्षिण पूर्व रेलवे के डीआरएम को ज्ञापन सौंपा। समिति का प्रमुख कार्यालय कोलाघाट (पूर्व मेदिनीपुर) में स्थित है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि करीब 50 वर्षों से बेरोजगार युवक रेलवे की अनुपयोगी भूमि पर छोटी दुकानें बनाकर ईमानदारी से अपनी आजीविका चला रहे हैं, जिन पर सैकड़ों परिवार निर्भर हैं और यात्रियों को भी आवश्यक सुविधाएं मिलती हैं।
इसके बावजूद रेलवे के निजीकरण की प्रक्रिया के तहत बड़े उद्योगपतियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि छोटे दुकानदारों को बिना पुनर्वास के हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय हॉकर अधिनियम 2014 की भावना के विपरीत है।

समिति ने डीआरएम के समक्ष मांग रखी कि किसी भी प्रकार की बेदखली से पहले दुकानदारों एवं झुग्गीवासियों का समुचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए, वर्तमान दुकानदारों को रेलवे भूमि पट्टे या किराए पर दी जाए, दुकानदारों से की जा रही अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगे।
रेलवे परिसर को हॉकर अधिनियम के दायरे में लाया जाए, रेलवे परिसरों का निजीकरण न किया जाए, मेदिनीपुर गेट बाजार में अस्थायी संरचनाओं को अनुमति दी जाए तथा कोलाघाट स्टेशन पर नए पुल निर्माण के कारण हो रहे धूल प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि वरिष्ठ डिप्टी कैशियर मैनेजर के निर्देश पर 8 मार्च 2022 को 1369 दुकानदारों की सूची रेलवे प्रशासन को सौंपी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस अवसर पर प्रसिद्ध ट्रेड यूनियन नेता शांति घोष सहित कांतु मालाकर, गोपाल माईती, शशांक शेखर माईती और सुरंजन महापात्र मौजूद रहे। समिति ने डीआरएम से शीघ्र सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।



