दक्षिण दिनाजपुर | 24 नवंबर 2025 : सर्दी की हल्की आहट ने दक्षिण दिनाजपुर ज़िले में रजाई बनाने का काम तेज़ कर दिया है। देर रात और सुबह के समय ठंडक महसूस होने लगी है, और इसी के साथ घरों-मोहल्लों में लोग पुराने रजाई निकालकर उनकी मरम्मत कर रहे हैं या नए रजाई बनवा रहे हैं।
🌟 कारीगरों की व्यस्तता
- स्थानीय और बिहार से आए कारीगरों की दुकानों पर रुई उड़ती दिखाई दे रही है।
- अहमद अली जैसे कारीगरों को पुराने रजाई तोड़कर नए बनाने के ज़्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं।
- गमरेंट के सूती रजाई की बिक्री भी बढ़ रही है।
- बाज़ारों में रजाई बनाने और बेचने का काम ज़ोरों पर है।
कुछ लोग बक्सों में बंद कंबलों को निकालकर उनकी मरम्मत कर रहे हैं। कुछ नए रजाई बना रहे हैं, इसलिए रजाई कारीगर व्यस्त हैं। दक्षिण दिनाजपुर ज़िले के विभिन्न इलाकों में कारीगर रजाई बनाते देखे गए।
कारीगरों की आवाज़ और हवा में उड़ती रुई इस बात का संकेत है कि सर्दी आ गई है। नतीजतन, कारीगर ज़िले की विभिन्न रजाई बनाने वाली दुकानों पर भी व्यस्त समय बिता रहे हैं।

🗣️ कारीगरों की राय
- अहमद अली: “अभी हल्की सर्दी है, लेकिन कुछ दिनों बाद दिन-रात काम करना पड़ेगा।”
- मोंटू चौधरी (बिहार): “पिछले हफ़्ते तक 5–10 ऑर्डर मिल रहे थे, अब शादियों के मौसम में रोज़ाना 20–25 ऑर्डर की उम्मीद है।”
- राकेश चौधरी: “कोट मैट के ऑर्डर पहले से ही मिल रहे हैं। कपास की कीमत बढ़ने से इस बार दाम भी ज़्यादा हैं।”
वे ज़िले के विभिन्न प्रमुख बाज़ारों और बाज़ारों में रजाई बेचने और बनाने में भी अपना समय बिता रहे हैं। एक कारीगर ने बताया कि एक हफ़्ते पहले भी ज़्यादा काम नहीं था।
पिछले एक हफ़्ते से सुबह के समय हल्का कोहरा पड़ने से सर्दी का एहसास थोड़ा कम हो रहा है। इसीलिए रजाई बनाने के ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
💰 कीमतों में बढ़ोतरी
- कपास की कीमत बढ़ने से बड़े कोट की कीमत पिछले साल के मुकाबले 200 रुपये ज़्यादा हो गई है।
- औसतन एक कोट की कीमत में 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
- कारीगरों की मज़दूरी भी इस बार थोड़ी ज़्यादा तय की गई है।
बिहार के कारीगर राकेश चौधरी ने बताया, “हमें सर्दियों की शुरुआत में ही कोट मैट के काफ़ी ऑर्डर मिल गए हैं और हम पहले से ही कुछ कोट मैट बना रहे हैं। आमतौर पर कई खरीदार इन्हें पहले से तैयार खरीद लेते हैं और इंतज़ार करते हैं।”
🌍 सामाजिक और आर्थिक महत्व
- सर्दी और शादी के मौसम में रजाई बनाने का काम स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देता है।
- बिहार और बंगाल के कारीगरों की मेहनत से बाज़ारों में रजाई और गद्दों की मांग पूरी होती है।
- यह काम न केवल रोज़गार देता है, बल्कि सर्दियों में लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने का अहम साधन भी है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस बार कपास की क़ीमत थोड़ी ज़्यादा होने की वजह से एक बड़े कोट की क़ीमत पिछले साल के मुक़ाबले 200 रुपये ज़्यादा है, यानी 150 रुपये से 100 रुपये तक। फिर से, एक कोट की क़ीमत में लगभग 100 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, साथ ही कारीगरों की मज़दूरी भी इस बार थोड़ी ज़्यादा हुई है।
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