तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। वर्तमान में इतिहास का विकृतिकरण आम बात है। क्षेत्रीय इतिहास पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। हालांकि, पुरातत्वविद् कृष्णकाली मंडल ‘छोटी-छोटी बातों’ पर विश्वास करने वाले थे। साथ ही वे दक्षिण 24 परगना के इतिहास और पुरातत्व के अध्ययन में एक अग्रणी थे। उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, बंगाल पुरातत्व अनुसंधान केंद्र ने उनके स्मरण में एक व्याख्यान का आयोजन किया।
कृष्णकाली मंडल स्मृति व्याख्यान :
– दूसरे वर्ष के व्याख्यान का विषय था, “बंगाल के इस्लामी स्थापत्य में समन्वयवादी धारा : सुल्तानी से औपनिवेशिक काल”।
– इस अवसर पर, रंगनकांति जाना द्वारा लिखित “पुराकीर्ति के आलोक में दक्षिण 24 परगना के मानव संस्कृति की धारा” नामक एक स्मारक पुस्तक का विमोचन किया गया।
– साथ ही तथागत सेन और राजीव बनर्जी द्वारा संपादित पुरातत्व विषयक पत्रिका “रक्तमृतिका” के तीसरे वर्ष के पहले अंक का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अंश :
– कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर रूपेंद्र कुमार चटर्जी ने की।
– मुख्य वक्ता इंद्रजीत चौधरी थे।
– एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति :
– इतिहास और पुरातत्व प्रेमी कई लोग उपस्थित थे, जिनमें अनूप मोतीलाल, गौतम बसुमल्ली, अमिताभ कारकुन, सुतनु घोष आदि प्रमुख थे।
– आयोजन के संयोजक तथागत सेन और संपादक राजीव बनर्जी ने बताया कि बंगाल पुरातत्व अनुसंधान केंद्र का यह आयोजन सफल रहा। अब से, राज्य के विभिन्न जिलों के पुरातत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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