कोलकाता हिन्दी न्यूज | 06 अगस्त 2026: विश्वभारती के शांतिनिकेतन स्थित प्रसिद्ध सोनाझुरी हाट एक बार फिर पर्यावरणीय विवादों के केंद्र में है।
इस बार आरोप है कि कुछ व्यापारियों ने जंगल के पेड़ों के नीचे ईंट और पत्थर का चबूतरा बनाकर अपनी दुकान की जगह स्थायी रूप से चिन्हित करने की कोशिश की।
मामले को लेकर बुधवार को व्यापारियों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद वन विभाग और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
पेड़ों के नीचे चबूतरा बनाने पर विवाद
स्थानीय लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जंगल क्षेत्र में पेड़ों के नीचे ईंट-पत्थर बिछाकर स्थायी कब्जे की कोशिश की जा रही थी।
इसका विरोध होने पर बहस और तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर शांतिनिकेतन थाना पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
वन विभाग ने दी चेतावनी
बोलपुर वन विभाग के अधिकारी ज्योतिष वर्मन ने स्पष्ट कहा कि वन क्षेत्र, विशेषकर पेड़ों के नीचे किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा, “वन विभाग की जमीन पर, खासकर पेड़ों के नीचे ईंट-पत्थर का चबूतरा बनाना नियमों के खिलाफ है। संबंधित व्यापारियों को चेतावनी दी गई है। जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
पहले से पर्यावरण अदालत में लंबित है मामला
सोनाझुरी हाट को लेकर पहले से ही पर्यावरण अदालत (एनजीटी) में मामला लंबित है। याचिका में जंगल के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कई आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- पेड़ों को नुकसान पहुंचाना
- जंगल में चारपहिया वाहनों की आवाजाही
- प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग
- ठोस कचरे का अनुचित निपटान
- अवैध कंक्रीट निर्माण
- वन भूमि का व्यावसायिक उपयोग
पर्यावरण कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्त का आरोप है कि वन संरक्षण कानून की अनदेखी कर लंबे समय से जंगल क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वहीं, हाट समिति का कहना है कि कुछ व्यापारियों ने केवल अपनी दुकान की जगह चिन्हित करने के लिए ईंट-पत्थर रखे थे।
वन विभाग की आपत्ति के बाद उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। समिति ने दावा किया कि जंगल को नुकसान पहुंचाने का समर्थन नहीं किया जाएगा।
छोटा हाट बना बड़ा पर्यटन केंद्र
करीब वर्ष 2000 में स्थानीय आदिवासी हस्तशिल्पियों द्वारा सप्ताह में एक दिन लगने वाले छोटे बाजार के रूप में शुरू हुआ सोनाझुरी हाट वर्ष 2016-17 के बाद तेजी से लोकप्रिय हुआ।
आज यह पूरे साल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। हालांकि बढ़ती भीड़ और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय भाजपा युवा मोर्चा के नेता अरुण दास ने भी आरोप लगाया कि कई व्यापारी स्थायी कब्जे के उद्देश्य से पेड़ों के नीचे ईंट-पत्थर का निर्माण कर रहे हैं।
वन विभाग ने साफ कर दिया है कि जंगल की हरियाली और प्राकृतिक स्वरूप से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हस्तशिल्पियों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
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