कोलकाता | 15 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद एक अहम तथ्य सामने आया है।
एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट क्षेत्रों में गिने जाने वाले Sonagachi की अधिकांश यौनकर्मियों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिए गए हैं।
दस्तावेजों की जांच और विशेष शिविरों के बाद Election Commission of India ने उन्हें मतदाता सूची में जगह देने का फैसला किया है।
इसी कारण इसे “रेड लाइट एरिया के यौनकर्मियों को चुनाव आयोग का ग्रीन सिग्नल” माना जा रहा है, जिससे समुदाय में राहत और खुशी का माहौल है।
सोनागाछी की सभी सेक्स वर्करों के नाम शामिल
इस प्रक्रिया में सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह सामने आया कि सोनागाछी क्षेत्र की लगभग सभी सेक्स वर्करों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि केवल 10 से 12 मामलों को छोड़कर बाकी सभी यौनकर्मियों के नाम बिना किसी त्रुटि के वोटर लिस्ट में दर्ज किए गए हैं।
सोनागाछी को एशिया के सबसे बड़े रेड लाइट क्षेत्रों में गिना जाता है, जहां करीब 6,000 सेक्स वर्कर रहती हैं।
संगठन के प्रयास से संभव हुआ
यौनकर्मियों के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन Durbar Mahila Samanwaya Committee ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगठन की सचिव बिशाखा लस्कर ने बताया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कई महिलाओं को दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
इस मुद्दे को लेकर संगठन ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर विशेष व्यवस्था की मांग की थी।
इसके बाद चुनाव कार्यालय की ओर से विशेष SIR शिविर आयोजित किए गए, जहां उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर यौनकर्मियों की पहचान सत्यापित की गई।
जिनके नाम नहीं जुड़े, उनके दस्तावेज अधूरे
कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां यौनकर्मी अपनी पहचान से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
इसके अलावा कुछ महिलाओं के नाम पहले से ही मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे। संगठन का कहना है कि ऐसे लोगों के नाम जुड़वाने के लिए आगे भी प्रयास किए जाएंगे।
बताया जाता है कि कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना करीब 4,000 सेक्स वर्कर काम के लिए सोनागाछी आती हैं, जिनमें से अधिकांश के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो चुके हैं।
नाम शामिल होने से समुदाय में खुशी
SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले कई यौनकर्मियों को यह डर था कि कहीं उनका नाम मतदाता सूची से न कट जाए।
लेकिन अब जब उनके नाम अंतिम सूची में शामिल हो गए हैं तो समुदाय में राहत और खुशी का माहौल है।
रामबागान इलाके की एक यौनकर्मी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वे पहले की तरह आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगी।
63.66 लाख नाम हटे, कई मामले अभी विचाराधीन
सूत्रों के अनुसार विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 63.66 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जबकि करीब 60 लाख नाम अभी भी ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखे गए हैं।
इन मामलों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही शामिल किए जाएंगे।
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