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भोजन करने के कुछ नियम…!

वाराणसी। ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री जी ने बताया कि सभी सनातनियों के लिए भोजन करने के कुछ नियम हैं जो कि निम्नलिखित है। आप सभी इसे अच्छे से जान ले और इन भोजन नियमों का जरूर पालन करें।

1. पांच अंगो (दो हाथ, 2 पैर, मुख) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !
2. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है!
3. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है!
4. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए!
5. दक्षिण दिशा की ओर मुख कर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है!

6. पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है!
7. शैय्या पर हाथ पर रख कर या टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए!
8. मल मूत्र का वेग होने पर, कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वट वृक्ष के नीचे, भोजन नहीं करना चाहिए!
9. परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए!
10. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के, उनका धन्यवाद देते हुए तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त हो, ईश्वर से ऐसी प्रार्थना करके भोजन करना चाहिए!

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11. भोजन बनाने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले 3 रोटिया अलग निकाल कर (गाय, कुत्ता, और कौवे हेतु) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर ही घर वालों को खिलाये!
12. इर्षा, भय, क्रोध, लोभ, रोग, दीन भाव, द्वेष भाव के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है!
13. आधा खाया हुआ फल, मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए!
14. भोजन छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए!
15. भोजन के समय मौन रहे!

16. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए!
17. रात्री में भरपेट न खाए!
18. गृहस्थ को 32 ग्रास से ज्यादा भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए!
19. सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन और अंत में कड़वा खाना चाहिए!
20. सबसे पहले रस दार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्रव्य पदार्थ ग्रहण करे!

21. थोडा खाने वाले को आरोग्य, आयु, बल, सुख, सुन्दर संतान और सौंदर्य प्राप्त होता है!
22. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो, वहा कभी न खाए!
23. कुत्ते का छुवा, रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राध का निकाला, मुंह से फूक मारकर ठंडा किया, बाल गिरा हुवा भोजन, अनादर युक्त, अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे!
24. कंजूस का, वेश्या के हाथ का, शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए!

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ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

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