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सोम प्रदोष व्रत आज

वाराणसी। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि महादेव को समर्पित मानी गई है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। साथ ही उनके निमित्त प्रदोष व्रत भी रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत को करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को खत्म करने के लिए भी प्रदोष व्रत रखा जाता है।

प्रदोष व्रत के दिन काले तिल को जल में मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करने से व्यत्ति को राहु-केतु और शनि की बाधा से मुक्ति मिलती है। इस समय माघ माह चल रहा है और यह महीना कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाला है। इसके बाद फाल्गुन महीना शुरू हो जाएगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि माघ माह का आखिरी प्रदोष व्रत कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।

माघ माह का दूसरा प्रदोष व्रत कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 9 फरवरी को शाम 07:25 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इस त्रयोदशी तिथि का समापन अगले दिन 10 फरवरी को शाम 7 बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, माघ माह का आखिरी प्रदोष व्रत 10 फरवरी, दिन सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। 9 फरवरी को प्रदोष काल शाम 07:25 मिनट से लेकर रात 08:42 मिनट तक है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा एवं अर्चना कर सकते हैं।

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सोम प्रदोष व्रत शुभ योग : ज्योतिषियों के अनुसार, माघ माह के आखिरी प्रदोष व्रत पर दुर्लभ त्रिपुष्कर योग, प्रीति और शिववास योग का संयोग बन रहा है। इसके अलावा, इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र का भी योग है। इन योग में भगवान शिव की पूजा उपासना करने से व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है।

शुभ मुहूर्त : ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05:20 मिनट से 06:12 मिनट तक।
विजय मुहूर्त – दोपहर 02:26 मिनट से 03:10 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06:04 मिनट से 06:30 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त – रात 12:09 मिनट से 01:01 मिनट तक।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि : पवित्र स्थान तैयार करें, एक साफ जगह या वेदी पर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर रखें। गंगाजल से स्नान कराएं, सबसे पहले भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएं।

चढ़ावे की सामग्री : अक्षत (अन्न), बेलपत्र (बिल्वपत्र), चंदन, फूल, फल, भांग, शहद, अगरबत्ती और दीपक अर्पित करें।

पंचाक्षर मंत्र का जाप करें: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का लगातार जाप करें।
शिव चालीसा का पाठ करें। भगवान शिव की स्तुति के लिए शिव चालीसा का पाठ करें, आरती करें। कपूर या घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें, प्रार्थना करें। पूजा के अंत में अपने परिवार और संतान की सुख-समृद्धि की कामना करें। अगर पूजा में कोई त्रुटि हो, तो भगवान से माफी मांगें। इस पूजा विधि से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

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सोम प्रदोष व्रत का महत्व क्या है? सोम प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति की मनचाही इच्छाएं पूरी होती हैं। और चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं का निवारण भी होता है। यह व्रत भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है। और इसे करने से आर्थिक तंगी और रोग दूर होते हैं।

सोम प्रदोष व्रत का पालन कैसे किया जाता है? सोम प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसे रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन उपवास करना चाहिए और शाम के समय शिव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। व्रत की विधि और कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

प्रदोष व्रत से कौन-कौन से लाभ होते हैं? प्रदोष व्रत से इच्छाएं पूर्ण होती हैं, आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं, विवाह में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं, और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होते हैं।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 9993874848

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