वाराणसी। सोम प्रदोष व्रत वह प्रदोष व्रत है जो सोमवार के दिन पड़ता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व :
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मनोकामनाओं की पूर्ति और दांपत्य सुख की प्राप्ति होती है।
रोग, ऋण और मानसिक कष्टों में राहत मिलने की मान्यता है।
पापों का क्षय और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
व्रत की विधि :
1. प्रातः स्नान करके भगवान शिव का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लें।
2. दिनभर यथा शक्ति उपवास रखें (फलाहार या निर्जल, अपनी क्षमता के अनुसार)।
3. सायंकाल प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
4. बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, भस्म, चंदन आदि अर्पित करें।
5. “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें तथा शिव चालीसा, शिव पंचाक्षर स्तोत्र या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
6. आरती करके प्रसाद वितरित करें और व्रत का पारण करें।
विशेष मंत्र :
ॐ नमः शिवाय
या
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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