जंगल महल की सामाजिक संस्था : चाइल्ड एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी…! नाम ही काफी है…!!

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर : जंगल महल की सामाजिक संस्थाओं में प्रमुख है पश्चिम मेदिनीपुर जिले की चाइल्ड एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी। सबंग प्रखंड के सुदूर गांव मारकंडाचक से इस संस्था ने अपनी यात्रा शुरू की थी। सफर के 53 सालों में इसने उपलब्धि के कई सुनहरे पन्ने अपने स्थापना काल में जोड़े हैं। पश्चिम मेदिनीपुर के विभिन्न प्रखंडों के साथ ही सोसाइटी झाड़ग्राम, बांकुड़ा और पुरुलिया जिले तक अपनी गतिविधियों का विस्तार कर चुकी है। जिसके केंद्र में है स्वास्थ्य, स्वावलंबन तथा शिशु व वृद्ध कल्याण।

सीएसडब्लयूएस (CSWS) के पदाधिकारियों के मुताबिक संस्था ने जीविकोपार्जन के क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर प्राकृतिक वस्तुएँ जैसे मादुर घास, बेंत, बाबुई घास तथा परित्यक्त कपड़ों आदि से हस्तशिल्प शुरू कर इससे उत्पन्न चीजों का अनुकूल बाजार तैयार किया है। निरंतर विकास पर जोर देते हुए सोसाइटी चीजों की गुणवत्ता, बाजार और कारीगरी को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। यही वजह है कि इसके खरीदार देश के कोने-कोने ही नहीं बल्कि विदेश तक से आते हैं। प्रदेश ही नहीं देश के विभिन्न भागों के नियुक्त प्रशिक्षकों के माध्यम से मादुर नामक विशेष प्रकार की घास से निर्मित चीजों को मिक्सड एंड मैच का प्रशिक्षण देने, बांस, परित्यक्त कपड़े, लकड़ी, बाबुई घास, जूट तथा शीतलपाटी आदि का साधारण सुविधा केंद्र तैयार करने, इस दिशा में शोध को बढ़ावा देने तथा प्रमोटरों के लिए भी इसने अनुकूल वातावरण तैयार किया है।

यही नहीं सोसाइटी अपने सामाजिक सरोकार के तहत नियमित स्वास्थ्य शिविरों के आयोजनों को भी प्रमुखता देती आई है, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिल सके। कम्युनिटी के तहत वयस्कों को केयर स्कीम के अधीन लाने की भी तैयारी है। 6 से 8 साल तक कुल 170 बच्चों के लिए कॉटेज के माध्यम से परिसेवा दी जा रही है। केंद्रीय कैंपस के जरिए उनकी शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, मनोरंजन और हस्त शिल्प प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। औपचारिक शिक्षा के साथ ही कोचिंग सेंटर और विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। सोसाइटी की नियमित गतिविधियों में विभिन्न विषयों पर कार्यशाला और संगोष्ठी का आयोजन भी शामिल है।

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