कोलकाता | 18 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी ताज़ा आंकड़ों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के मुताबिक, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए आए आवेदन, हटाए गए मतदाताओं की संख्या के मुकाबले बेहद कम हैं।
हटाए गए 58 लाख नाम, नए आवेदन सिर्फ 3.24 लाख
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, SIR के पहले चरण में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कुल 3,24,800 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके मुकाबले अक्टूबर 2025 की पिछली मतदाता सूची से 58,20,899 नाम हटाए गए हैं। यह अंतर चुनावी आंकड़ों के लिहाज से असामान्य और चिंताजनक माना जा रहा है।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| हटाए गए नाम | 58 लाख 20 हजार 899 |
| नए पंजीकरण आवेदन (फॉर्म-6) | 3 लाख 24 हजार 800 |
| अनमैप्ड मतदाता | 30 लाख 59 हजार 273 |
| संदिग्ध परिवार आंकड़े | 1.60 करोड़ मामलों में |
| अंतिम सूची जारी तारीख | 14 फरवरी 2026 |
नए आवेदनों में क्या शामिल?
फॉर्म-6 में 18 साल पूरे कर चुके नए मतदाता और क्षेत्र बदलने वाले शामिल हैं। अधिकारी कहते हैं कि संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि दावा-आपत्ति की समयसीमा 15 जनवरी तक है। लेकिन अभी का अंतर बहुत बड़ा है।
सूत्रों का कहना है कि नए पंजीकरण के आवेदन, उन 30,59,273 अनमैप्ड मतदाताओं की संख्या के सामने भी बेहद कम हैं, जिनका 2002 की मतदाता सूची से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2002 में ही राज्य में आखिरी बार SIR किया गया था। इन मतदाताओं के नाम न तो स्व-मैपिंग (Self Mapping) से और न ही संतान-मैपिंग (Parent-Child Mapping) से जुड़ पाए हैं।
फॉर्म-6 में कौन शामिल
नए पंजीकरण के लिए भरे गए फॉर्म-6 में
- 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाता, और
- वे मतदाता शामिल हैं जिन्होंने अपना निर्वाचन क्षेत्र बदलने के लिए आवेदन किया है।
हालांकि, निर्वाचन अधिकारी यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में आवेदन की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि फॉर्म-6 जमा करने की समय-सीमा अभी समाप्त नहीं हुई है।
14 फरवरी को आएगी अंतिम मतदाता सूची
चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इसके साथ ही 4 नवंबर से शुरू हुआ SIR अभियान समाप्त हो जाएगा। इसके बाद ही राज्य में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की जाएगी।
राजनीतिक तूफान
- TMC का आरोप: पार्टी ने इसे “वोटरों को डराने और नाम काटने की साजिश” बताया। सूत्रों ने कहा कि अनमैप्ड वोटरों को नोटिस भेजकर दबाव बनाया जा रहा है।
- भाजपा का दावा: “यह फर्जी वोटर्स की सफाई है। TMC डर रही है क्योंकि उनका वोटबैंक प्रभावित हो रहा है।”
- विपक्ष: कांग्रेस और लेफ्ट ने भी SIR को “लोकतंत्र पर हमला” बताया।
ड्राफ्ट सूची में नाम होना अंतिम गारंटी नहीं
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट सूची में नाम होना, चाहे वह स्व-मैपिंग या संतान-मैपिंग के जरिए दर्ज हुआ हो, अंतिम सूची में नाम बने रहने की गारंटी नहीं है।
आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 1.60 करोड़ मतदाताओं के मामलों में परिवार संबंधी संदिग्ध और असामान्य आंकड़े सामने आए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद और कानूनी बहस और तेज़ होने की संभावना जताई जा रही है।
यह SIR 2026 विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की सफाई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे वोटिंग प्रतिशत और सियासी समीकरण बदल सकते हैं। क्या नए आवेदन बढ़ेंगे या हटाए नामों का असर पड़ेगा? अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।
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