कोलकाता | 3 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बीच एक बेहद चिंताजनक और दुखद मामला सामने आया है। राजधानी कोलकाता में SIR से जुड़ी सुनवाई के लिए कार्यालय परिसर के बाहर लाइन में खड़ी 32 वर्षीय महिला सेरीना बीबी की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
घटना के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया, मानसिक दबाव और SIR को लेकर चल रहे विवाद पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
नोटिस मिलने के बाद बढ़ा तनाव
जानकारी के मुताबिक, सेरीना बीबी और उनके पति सिद्दीक अली ने SIR के तहत वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के लिए फॉर्म भरा था। दोनों के फॉर्म में कुछ जानकारियों में गड़बड़ी पाई गई थी, जिसके बाद संबंधित कार्यालय की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया गया।

परिजनों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद से ही सेरीना मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं। उन्हें डर सता रहा था कि कहीं फॉर्म की गलती को लेकर कानूनी कार्रवाई या जेल न हो जाए।
लाइन में खड़े-खड़े बिगड़ी तबीयत
मंगलवार को सेरीना बीबी सुनवाई के लिए कार्यालय पहुंचीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह लंबी लाइन में खड़ी थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं।
उन्हें तुरंत देगांगा बिश्वनाथपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, मौत का कारण हार्ट अटैक है।
डर और मानसिक दबाव ने ली जान
परिवार वालों का आरोप है कि SIR नोटिस और उससे जुड़ा डर ही सेरीना की मौत की वजह बना। परिजनों ने कहा— “नोटिस आने के बाद वह लगातार डर में जी रही थी। उसे लगता था कि कहीं जेल न जाना पड़े। यही तनाव उसके दिल पर भारी पड़ा।”
राजनीतिक हलकों में मचा हंगामा
घटना के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेता सेरीना के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर संवेदना जताई।
टीएमसी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। एक टीएमसी नेता ने कहा— “SIR सुनवाई के नाम पर हो रहे उत्पीड़न की वजह से एक और जान चली गई। कई लोग डर के साये में जी रहे हैं, जबकि कुछ अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इन अनैतिक प्रथाओं को तुरंत रोका जाना चाहिए।”
SIR प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर पहले से ही राजनीतिक टकराव तेज है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि इस प्रक्रिया के जरिए आम लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है, जबकि प्रशासन इसे चुनावी शुद्धता के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
सेरीना बीबी की मौत ने अब इस पूरी प्रक्रिया के मानवीय पहलू को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।
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