कोलकाता हिन्दी न्यूज | 03 अगस्त 2026: मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के कारण नाम हटने से IIT कानपुर में एक छात्र का PhD प्रवेश अटक गया है। मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने SIR अपील ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया है कि छात्र की अपील पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का प्रयास किया जाए, ताकि उसकी शैक्षणिक पढ़ाई प्रभावित न हो।
वोटर लिस्ट से नाम हटने का असर PhD एडमिशन पर
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आयान नवाज को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए IIT कानपुर के भौतिकी विभाग में PhD कार्यक्रम में प्रवेश मिल चुका है।
लेकिन SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से उनका नाम हट गया। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने SIR अपील ट्रिब्यूनल में अपील दायर की, जो अभी लंबित है। इसी वजह से उनके प्रवेश की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने कहा कि अपील लंबित रहने के कारण छात्र का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया कि यदि संभव हो तो एक सप्ताह के भीतर अपील का निपटारा किया जाए, ताकि छात्र का IIT कानपुर में दाखिला समय पर हो सके।
क्या है SIR ट्रिब्यूनल?
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों पर आपत्ति और विवाद सामने आए थे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ऐसे मामलों के निपटारे के लिए विशेष SIR अपील ट्रिब्यूनल बनाया जाए। अदालत के निर्देश पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल कर ट्रिब्यूनल गठित किया गया।
फिलहाल इस ट्रिब्यूनल का कार्यालय जोका (कोलकाता) में संचालित हो रहा है, जहां मतदाता सूची से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई की जा रही है।
शिक्षा पर प्रशासनिक प्रक्रिया का असर
यह मामला इस बात की ओर भी संकेत करता है कि प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रियाओं के लंबित रहने से छात्रों के उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। हाई कोर्ट की टिप्पणी को ऐसे मामलों में समयबद्ध सुनवाई की आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।
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