कोलकाता हिन्दी न्यूज़ | क्रिकेट डेस्क : दिल्ली के एक सामान्य से परिवार में जन्मे शिखर धवन ने क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दुनिया को चकित कर दिया। आज उनका 40वां जन्मदिन है—5 दिसंबर को जन्मे इस ‘गब्बर’ ने भारतीय ओपनिंग की नींव मजबूत की।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह उपनाम, जो अब उनके नाम का पर्याय बन चुका है, कैसे मिला? बीबीसी हिंदी की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम खोलेंगे उस मजेदार किस्से का राज, जो रणजी ट्रॉफी के एक फील्डिंग सेशन से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक फैल गया।
‘गब्बर’ नाम की शुरुआत:
शिखर धवन ने खुद कई इंटरव्यू में इस कहानी को साझा किया है। बात 2000 के दशक की शुरुआत की है, जब धवन दिल्ली की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल रहे थे। एक मैच में वे सिली पॉइंट पर फील्डिंग कर रहे थे।

विपक्षी टीम की बल्लेबाजी जोड़ी मजबूत साझेदारी बना रही थी, और भारतीय टीम के खिलाड़ी ऊर्जा खोने लगे थे। धवन ने टीम का मनोबल ऊंचा करने के लिए बॉलीवुड की क्लासिक फिल्म ‘शोले’ (1975) के विलेन गब्बर सिंह के डायलॉग चुरा लिए।
धवन ने बताया: “विपक्षी टीम की बड़ी साझेदारी चल रही थी, तो खिलाड़ी थकान महसूस करने लगे। मैं सिली पॉइंट पर बैठा था और चिल्लाता था—’बहुत याराना है सूअर के बच्चों!’ टीम वाले हंस-हंसकर लोटपोट हो जाते।”
यह डायलॉग ‘शोले’ के गब्बर (अमजद खान द्वारा अभिनीत) का मशहूर संवाद ‘बहुत याराना है’ से प्रेरित था, जो फिल्म में उनके क्रूर लेकिन यादगार अंदाज को दर्शाता है।
किसने दिया नाम?
इस नाम के पीछे का श्रेय धवन के तत्कालीन कोच विजय दहिया को जाता है। दहिया, जो खुद पूर्व भारतीय विकेटकीपर और दिल्ली के कोच थे, ने धवन के इस ‘गब्बरिया’ अंदाज को देखा और उन्हें तुरंत ‘गब्बर’ कहना शुरू कर दिया।
धवन ने स्पोर्ट्सटाक को दिए इंटरव्यू में कहा: “हमारे कोच (विजय) ने वहीं से मेरा नाम गब्बर रख दिया। वहां से नाम इतना फेमस हो गया कि दुनिया भर के क्रिकेट फैंस अब मुझे सिर्फ गब्बर ही कहते हैं।”
दहिया ने धवन के आक्रामक फील्डिंग और फिल्मी डायलॉग्स को देखते हुए यह उपनाम दिया, जो धवन की फील्ड पर ‘डरावनी’ लेकिन मनोरंजक मौजूदगी से मेल खाता था।
धवन ने 2017 में विक्रम सथाए के शो ‘व्हाट द डक 2’ में भी यही किस्सा दोहराया: “मैं सिली पॉइंट पर खड़ा होकर ‘बहुत याराना लगता है’ चिल्लाता था, और टीम हंस पड़ती।”
धवन का ‘शोले’ कनेक्शन और क्रिकेट स्टाइल
‘गब्बर’ नाम सिर्फ मजाक नहीं था—यह धवन की क्रिकेट शैली से जुड़ गया। जैसे फिल्म का गब्बर बेखौफ और आक्रामक था, वैसे ही धवन मैदान पर तेज रन बनाते और विरोधियों को ‘चिढ़ाते’। 2013 में टेस्ट डेब्यू पर 187 गेंदों में शतक (सबसे तेज डेब्यू टेस्ट सेंचुरी) ने इस नाम को अमर कर दिया।
IPL में दिल्ली डेयरडेविल्स (अब कैपिटल्स) के साथियों ने भी इसे अपनाया, और जल्दी ही यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया। धवन ने रिटायरमेंट वीडियो में कहा: “गब्बर नाम मेरी पहचान बन गया। यह मेरी जिंदादिली और क्रिकेट के प्रति जुनून को दिखाता है।”
विशेषज्ञों और साथियों की नजर में ‘गब्बर’
विराट कोहली (पूर्व कप्तान, भारतीय टीम): “शिखर भाई का गब्बर नाम बिल्कुल फिट बैठता है। फील्ड पर वे विरोधियों को ‘बहुत याराना’ कहकर हंसाते और रन चुराते। विजय सर ने सही पकड़ा उनका अंदाज।” (बीबीसी इंटरव्यू, 2023)
विजय दहिया (कोच, नाम देने वाले): “शिखर का वो चिल्लाना देखकर लगा—यह तो गब्बर है! फिल्मी डायलॉग्स से टीम का मूड चेंज कर देता था। नाम चिपक गया, और सही भी।” (क्रिकेट टाइम्स को साक्षात्कार, 2017)
हरभजन सिंह (पूर्व स्पिनर): “गब्बर का नाम सुनते ही ‘कितने आदमी थे’ याद आ जाता। लेकिन मैदान पर वे असली हीरो थे—ओपनिंग में तूफान लाते। हैप्पी बर्थडे, भाई!” (एक्स पोस्ट, 2024)
आज का ‘गब्बर’: विरासत और भविष्य
40 साल की उम्र में धवन IPL में पंजाब किंग्स के मेंटर बने हैं। उनके नाम 34 टेस्ट, 167 वनडे और 68 टी20 में 10,867 अंतरराष्ट्रीय रन हैं। लेकिन ‘गब्बर’ नाम आज भी फैंस के दिलों में बसा है—जैसे ‘शोले’ का संवाद। जन्मदिन पर धवन ने इंस्टाग्राम पर लिखा: “गब्बर अभी भी जिंदा है! थैंक यू फैंस।”
शिखर धवन साबित करते हैं कि क्रिकेट सिर्फ रन नहीं, बल्कि कहानियां भी हैं। ‘बहुत याराना’ से शुरू हुई यह यात्रा आज वैश्विक ब्रांड है। हैप्पी बर्थडे, गब्बर!
(कोलकाता हिन्दी न्यूज़, क्रिकेट डेस्क, तारीख: 5 दिसंबर 2025)
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