वाराणसी। रावण सहिंता अनुसार जब आपकी कुंडली में “राहु ग्रह” खाना न. 12 और केतु देव खाना न. 6 में बेठे और आंशिक नहीं पूर्ण काल सर्प दोष बने यही की इन दोनों ग्रहों के बीच सारे ग्रह बेठे “शेषनाग कालसर्प” दोष से व्यक्ति को मानसिक अशांति, क्रोध, और विवाद जैसी कई नकारात्मकताओं का सामना करना पड़ता है।
यह दोष स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे पेट संबंधी बीमारियां) और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है। इसके अलावा, इसके कारण विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, व्यक्ति अपने प्रयासों और कड़ी मेहनत से इन समस्याओं से उबर सकता है और स्वावलंबन प्राप्त कर सकता है।
शेषनाग कालसर्प दोष के प्रभाव :
मानसिक और भावनात्मक :
मानसिक तनाव, चिंता और अनिद्रा।
अशांत स्वभाव और बात-बात पर गुस्सा आना।
बदनामी और सामाजिक सम्मान में कमी।
स्वास्थ्य :
शारीरिक और मानसिक आघात और दुर्घटनाएं।
पेट संबंधी परेशानियां, जैसे कि फिस्टुला, पाइल्स और फिशर।
आर्थिक और कानूनी :
आर्थिक अस्थिरता और कर्ज में फंसना।
छुपे हुए शत्रुओं या धोखाधड़ी का सामना करना।
अनावश्यक कानूनी मामलों में फंसना।
विवाह और संबंध :
विवाह में देरी होना।
वैवाहिक जीवन में कई तरह की समस्याएं और तलाक की नौबत।
अन्य :
जीवन में बार-बार हानि या विफलता का अनुभव।
विदेश यात्रा में बाधाएं या विदेश जाने की तीव्र इच्छा।
सांपों का डर।
शेषनाग कालसर्प दोष से उबरने के तरीके :
नियमित रूप से मंदिर जाना और पूजा-पाठ करना।
गुस्से पर नियंत्रण रखना और गलत निर्णय लेने से बचना।
नशे से दूर रहना, और यदि करना पड़े तो शनिवार को उतना ही दान करना।
काले, नीले और भूरे रंग के कपड़े पहनने से बचना और हल्के रंग के कपड़े पहनना।
दिन में सोने से बचना और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना।
व्यापार में साझेदारी से बचना।
अपने घर के सामने कोई खाली जगह नहीं छोड़ना।
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ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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