कोलकाता हिन्दी न्यूज | 29 जुलाई 2026: विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के हाथ से सत्ता जाने के बाद पश्चिम बंगाल की नगरपालिकाओं की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कोलकाता समेत एक के बाद एक नगरपालिका बोर्डों में उथल-पुथल का असर अब नगर निकायों के राजस्व संग्रह पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।
नगरपालिका सूत्रों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में संपत्ति कर वसूली में महज करीब 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में संपत्ति कर वसूली की वृद्धि दर 12 प्रतिशत से अधिक थी। राजस्व संग्रह की रफ्तार में आई इस गिरावट का सीधा असर नगर निगम के खजाने पर पड़ने लगा है।
मेयर के इस्तीफे के बाद बदली व्यवस्था
पिछले मई में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से फिरहाद हकीम ने इस्तीफा दिया था। इसके बाद 8 जून को कोलकाता नगर निगम का निर्वाचित बोर्ड भंग कर दिया गया। इसके साथ ही नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में भी व्यापक बदलाव हुए।
नगरपालिका सूत्रों का कहना है कि जून के दूसरे सप्ताह से निगम के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को अन्नपूर्णा योजना से जुड़े काम में लगाया गया है। इनमें सोशल वेलफेयर, स्वास्थ्य एवं जल विभाग, सिविल इंजीनियरिंग तथा असेसमेंट विभाग के कर्मचारी शामिल हैं।
इसका असर सीधे नागरिक सेवाओं पर भी पड़ रहा है। एक ओर सड़क, जलापूर्ति और निर्माण से जुड़े कई काम प्रभावित हुए हैं, वहीं दूसरी ओर बारिश के मौसम में डेंगू को लेकर चलाए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रम भी बाधित होने की बात सामने आ रही है।
बकायेदारों से कर वसूली भी प्रभावित
नगरपालिका अधिकारियों के एक वर्ग के मुताबिक, संपत्ति कर के बकायेदारों के घरों और संस्थानों में जाकर निरीक्षण करने तथा मौके पर कर वसूली की प्रक्रिया चलाने के लिए कर्मचारियों के पास पर्याप्त समय नहीं बच रहा है। इसका असर राजस्व संग्रह पर पड़ रहा है।
वहीं, रोजमर्रा की नागरिक सेवाओं पर भी इसका दबाव बढ़ता जा रहा है। नगर निगम के कर्मचारियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के काम में लगाने से उनके नियमित विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारियों पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ
कोलकाता नगर निगम के 144 वार्डों में पिछले वर्षों के दौरान सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्तर के कई काम काउंसिलरों के माध्यम से संचालित होते थे। लेकिन निर्वाचित बोर्ड भंग होने के बाद इन जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा अब नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों पर आ गया है।
तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में ‘दुआरे सरकार’ जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी स्थानीय स्तर पर काउंसिलरों और पार्टी संगठन की भूमिका रहती थी। स्वास्थ्य साथी और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं से जुड़े काम भी संबंधित क्षेत्रों में इसी व्यवस्था के जरिए संचालित होते थे।
अब काउंसिलरों के नहीं रहने के कारण इन कामों का अतिरिक्त बोझ नगर निगम के विभिन्न विभागों पर आ गया है। कर्मचारी इलाकों में जाकर अन्नपूर्णा योजना से जुड़े कार्य कर रहे हैं।
जनगणना के काम से भी बढ़ेगा दबाव
नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों पर काम का दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है। 1 अगस्त से जनगणना से जुड़े कार्यों में भी नगर निगम के कर्मचारी और अधिकारी लगाए जाएंगे।
ऐसे में नगर निगम के नियमित कामकाज पर और असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पुर एवं नगर विकास विभाग के सूत्रों के मुताबिक, केवल कोलकाता नगर निगम ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य नगर क्षेत्रों में भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं।
ऐसे में आने वाले समय में नागरिक सेवाओं के साथ-साथ नगर निकायों की राजस्व व्यवस्था को लेकर भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती हो सकती है।
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