तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर : पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी में दे परिवार द्वारा एक अनोखे तरीके से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है। इस परिवार के सदस्य पिछले पांच वर्षों से एक ही चाला (खड़ की संरचना) में एक ही मिट्टी की मूर्ति और साज-सज्जा के साथ दुर्गा पूजा करते आ रहे हैं।
इस परिवार में दुर्गा पूजा की एक अनोखी परंपरा है, जिसमें एकचाला (खड़ की संरचना) में देवी की पूजा की जाती है। उल्टा रथ के दिन इस एकचाला को तैयार किया जाता है और उसी दिन से पूजा की शुरुआत होती है।
दे परिवार की कुलदेवी लक्ष्मी हैं, और पारंपरिक रूप से दुर्गा पूजा के दौरान लक्ष्मी की पूजा किए बिना दुर्गा पूजा की शुरुआत नहीं होती है।इस परिवार के लिए दुर्गा पूजा एकता और परिवार के बंधन का प्रतीक है।
पूजा के दिनों में परिवार के जो सदस्य बाहर रहते हैं, घर आते हैं और रिश्तेदारों और मित्रों का जमावड़ा लगता है।
देवी की मूर्ति पारंपरिक रूप से बनाई जाती है और उन्हें बनारसी साड़ी और सोने के आभूषणों से सजाया जाता है।
शालबनी के दे परिवार की मूल पूजा शालबनी दुर्गा मंदिर में होती थी, जहां देवी छोटी मूर्ति में पूजी जाती थीं। कालांतर में यह पूजा दक्षिणपाड़ा सार्वजनिक दुर्गात्सव के रूप में प्रसिद्ध हुई।
इस प्रकार, शालबनी के दे परिवार द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजन है, जो परिवार की एकता और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है।
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