तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत शालबनी में जब किसी गरीब परिवार का सदस्य बीमार पड़ता है या किसी असहाय को अस्पताल तक पहुंचाने वाला कोई नहीं होता, तो लोगों को सबसे पहले जिस नाम की याद आती है, वह है कार्तिक महतो उर्फ ‘तारकाटा टिंकू’।
युवा समाजसेवी कार्तिक महतो ने सेवा को केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बना लिया है। वे जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर इलाज की व्यवस्था कराने तक हर कदम पर उनके साथ खड़े रहते हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। किताब, कॉपी और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर वे कई बच्चों की शिक्षा का सहारा बन रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की घड़ी में कार्तिक महतो बिना किसी भेदभाव के मदद के लिए पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि इलाके में कई लोग उन्हें गरीब और असहाय परिवारों का ‘मसीहा’ मानते हैं।
कार्तिक महतो का मानना है कि इंसान अपने साथ धन-दौलत नहीं ले जाता, लेकिन उसके अच्छे कर्म और मानवीय मूल्य समाज में उसकी पहचान छोड़ जाते हैं। इसी सोच के साथ वे लोगों के सहयोग से सेवा कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
उनका कहना है कि भविष्य में भी वे जरूरतमंदों के लिए अपनी मुहिम जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता के दौर में कार्तिक महतो की पहल यह संदेश देती है कि संवेदनशीलता और मानवता आज भी जिंदा है, बस उसे आगे बढ़ाने वाले हाथों की जरूरत है।
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