तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर : पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी में एक अभिनेत्री के घर में दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह पूजा चुआड़ विद्रोह और शिवायन काव्य के इतिहास से भी जुड़ी हुई है।
अंग्रेज काल में चुआड़ विद्रोह के समय रानी शिरोमणि और करणगढ़ के राजाओं का उल्लेख इतिहास में मिलता है। रानी शिरोमणि के परिवार के कुल देवता दंडेश्वर, खड़गेश्वर और महामाया की पूजा आज भी की जाती है।
कवि रामेश्वर भट्टाचार्य ने चन्द्रचूड़ के निर्देश पर शिवायन काव्य की रचना की थी। चन्द्रचूड़ और उनके भाई रुद्रचूड़ के वंशज आज भी इस पूजा को संपन्न करते हैं।
इस पूजा में देवी की मूर्ति नहीं होती है, बल्कि घट और पोट की पूजा की जाती है। साथ ही कुमारी पूजा भी की जाती है। नवमी के दिन चक्रवर्ती परिवार से पूजा महामाया मंदिर में भेजी जाती है।
बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री प्रख्यात अभिनेत्री सुकन्या चक्रवर्ती के परिवार द्वारा यह पूजा की जाती है। उनके पिता देवाशीष चक्रवर्ती इस पूजा के वर्तमान संरक्षक हैं।
इसका ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में राधारमण चक्रवर्ती की महत्वपूर्ण भूमिका थी, जो इस चक्रवर्ती परिवार के संबंधी थे। उन्होंने एक इतिहासकार के रूप में भी पहचान बनाई।
शालबनी में इस दुर्गा पूजा का आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह ऐतिहासिक चुआड़ विद्रोह और शिवायन काव्य के इतिहास से भी जुड़ी हुई है और स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।




