Sex workers kolkata

बंगाल : सेक्स वर्कर्स ने SIR में नामांकन के लिए वोटर लिस्ट में शामिल होने की मांग की

कोलकाता | 17 नवंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान सोनागाछी की सेक्स वर्कर्स ने सरकार से अपने नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की मांग की है।

कई सेक्स वर्कर्स को डर है कि दस्तावेज़ों की कमी के कारण वे मतदाता सूची से बाहर रह जाएँगी, क्योंकि उनका अपने परिवार या मूल घरों से वर्षों से कोई संपर्क नहीं है।

🗣️ NGO और समुदाय की अपील

  • सेक्स वर्कर्स के लिए काम करने वाले NGO ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित अपील सौंपी
  • मांग: सोनागाछी में विशेष सत्यापन और रजिस्ट्रेशन कैंप लगाए जाएँ
  • उद्देश्य: मौके पर ही नामांकन की सुविधा, ताकि कोई बाहर न रह जाए

समिति की सचिव बिशाखा लस्कर ने सरकार से सेक्स वर्कर्स के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ज्यादातर सेक्स वर्कर्स अपने परिवारों से संपर्क में नहीं हैं, क्योंकि वे वर्षों पहले घर छोड़ चुकी हैं।

👩‍💼 समिति की सचिव का बयान

  • “ज्यादातर सेक्स वर्कर्स अपने परिवारों से संपर्क में नहीं हैं। दस्तावेज़ों की कमी के कारण SIR में समस्या आ रही है।”
  • उन्होंने कहा कि:
    • 2002 में पहली बार सेक्स वर्कर्स को वोटर आईडी कार्ड मिले
    • उसके बाद ही उन्हें वोटिंग का अधिकार मिला
    • अब कई के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल जैसे दस्तावेज़ मौजूद हैं
  • अपील: इन दस्तावेज़ों को मान्यता देकर नाम शामिल किए जाएँ

उन्होंने कहा, ‘सेक्स वर्कर्स को SIR में समस्या आ रही है क्योंकि हर किसी के पास दस्तावेज नहीं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई ने घर छोड़ दिया है और परिवारों से कोई संबंध नहीं है। हमारी मांग है कि सेक्स वर्कर्स के नाम उनके पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर शामिल किए जाएं, तो अच्छा होगा।’

⚖️ मुद्दे की अहमियत

  • सेक्स वर्कर्स का कहना है कि 2002 की वोटर लिस्ट में उनके नाम नहीं होंगे
  • अब उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर नामांकन किया जाए
  • इससे समुदाय को लोकतांत्रिक अधिकारों का लाभ मिलेगा और समावेशन सुनिश्चित होगा

बिशाखा लस्कर ने बताया कि सेक्स वर्कर्स को 2002 में वोटर आईडी कार्ड मिले थे। उसके बाद ही वे वोटिंग शुरू कर सकीं। उन्होंने कहा, ‘सेक्स वर्कर्स को 2002 में आधिकारिक वोटर आईडी कार्ड मिले थे। उससे पहले उनके पास कोई वोटर आईडी कार्ड नहीं था।

हमने 2002 के बाद वोटिंग का अधिकार हासिल करना शुरू किया। ऐसे में हमारा नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं होगा।’ लस्कर ने कहा कि अब कई सेक्स वर्कर्स के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड आदि जैसे आधिकारिक दस्तावेज हैं।

उन्होंने सरकार से इन दस्तावेजों को मान्यता देने की अपील की है। अब कुछ लोगों के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बिजली बिल आदि जैसे दस्तावेज हैं। हम सरकार से अपील करते हैं कि SIR में इन दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम जोड़े जाएं, इससे समुदाय को फायदा होगा।

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