IMG 20260806

प्रेमचंद जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में सामाजिक सरोकारों पर हुआ गंभीर विमर्श

आसनसोल। महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर 2 अगस्त 2026 को आसनसोल हिंदी गवेषक संघ एवं आस्था के संयुक्त तत्त्वावधान में दयानंद विद्यालय, आसनसोल में “सामाजिक सरोकार और प्रेमचंद का साहित्य” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थाओं एवं सामाजिक संगठन से हिंदी प्रेमी आए थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के पूर्व कुलपति प्रो. दामोदर मिश्र ने की। मुख्य वक्ता के रूप में वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी, बारासात के प्रो. अरुण होता तथा गुरु नानक महाविद्यालय, धनबाद के डॉ. सोनू यादव थें। कार्यक्रम का विषय-प्रवर्तन आस्था के संयोजक नवीन चंद्र सिंह ने किया। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य में निहित मानवीय मूल्यों, सामाजिक चेतना और समकालीन संदर्भों पर प्रकाश डाला।

प्रमुख वक्ता डॉ. सोनू प्रसाद यादव ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की आवाज है तथा आज भी सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रेरणा प्रदान करता है। उनका धनपत राय से प्रेमचन्द की यात्रा सहज नहीं था। अपने रचना में प्रेमचन्द आज भी कालजयी है। उनके स्त्री पात्र, दलित पात्र, किसान पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करता हैं। डॉ. यादव ने प्रेमचन्द के उपन्यासों, कहानियों, उनकी जीवनी आदि का हवाला देते हुए उनकी रचना धार्मिता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता के रूप में आलोचक एवं साहित्य मर्मज्ञ प्रो. अरुण होता ने अपने व्याख्यान में कहा कि – हर रचनाकार की सफलता उनकी अप्रासंगिकता में है। जिन समस्याओं से रचनाकार जूझता है उसे पाटना आवश्यक है जब तक समस्याएं खत्म नहीं होती है वह प्रासंगिक बने रहते है।

यह भी पढ़ें:  गायत्री परिवार की शैल दीदी ने किया अर्चनांजलि का विमोचन

आगे उन्होंने कहा एक राजनीतिज्ञ और एक साहित्यकार के लिये स्वतंत्रता के मायने भिन्न है। राजनीतिज्ञ सत्ता पलटने को आजादी कहते है पर साहित्यकार जॉन की जगह गोविन्द को सत्ता में बैठाने को आजादी स्वीकार नहीं करते। साहित्यकार हर प्रकार के शोषण, असमानता, भेदभाव से मुक्ति को आजादी के दायरे में लाते हैं।

प्रो. होता ने प्रेमचन्द की परंपराओं के कथाकार और प्रेमचन्द के मायने को अपने व्याख्यान में प्रस्तुत किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि लमही के बाद आसनसोल में प्रेमचन्द की मूर्ति लगी। फिर बर्नपुर में प्रेमचन्द की मूर्ति लगी। उन्होंने रानीगंज में हुए राहुल सांकृत्यायन के मूर्ति के क्षति होने की गंभीर रूप से आलोचना एवं चिंता प्रकट की, डॉ. मिश्र ने प्रेमचन्द के साहित्य और आज के संदर्भ में उनका मूल्यांकन किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन आसनसोल हिंदी गवेषक संघ के सचिव डॉ. विजेंद्र प्रसाद ने किया। अंत में रानीगंज टी.डी.बी. कॉलेज के डॉ. शेख आलम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में दयानंद विद्यालय के अध्यापकों का भी योगदान रहा।

यह भी पढ़ें:  हावड़ा : बाली में स्टोभ फटने से रेस्टोरेंट में लगी आग

संगोष्ठी में कथाकार सृजय, कथाकार महावीर राजी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षक मनोज यादव, सामाजिक कार्यकर्ता सिंटू भुईयां, डॉ. श्रीकांत द्विवेदी, डॉ. बिजय नारायण, डॉ. प्रमोद प्रसाद, डॉ. बिजय प्रसाद, डॉ. संजय पासवान, डॉ. ललिता महतो, डॉ. प्रीति, डॉ. मंजू, डॉ. बीरू रजक सहित अनेक शिक्षकों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और साहित्य-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि प्रेमचंद का साहित्य केवल अपने समय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि वर्तमान समाज के लिए भी एक सशक्त मार्गदर्शक है। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प व्यक्त किया गया कि प्रेमचंद के साहित्यिक एवं मानवीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक एवं साहित्यिक आयोजनों का क्रम निरंतर जारी रहेगा।

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

राज कुमार गुप्त Avatar

राज कुमार गुप्त पिछले 12+ वर्षों से सब-एडिटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन में काम कर रहे हैं। वे खबरों को सटीक और संतुलित रूप देने में विशेषज्ञ हैं। कोलकाता के स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ है।

यह भी पढ़ें:  भारत भूमि में महत्त्व मिला है गुरु से जुड़े विद्या वंश को - प्रो. शर्मा
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

17 + one =