कोलकाता हिन्दी न्यूज | 11 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर स्थित माहेश में तृणमूल कांग्रेस की प्रस्तावित सभा को लेकर कानूनी विवाद फिलहाल खत्म नहीं हुआ है। कलकत्ता हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मामले में प्रक्रिया संबंधी खामियों का हवाला देते हुए याचिका को फिर से एकल पीठ के पास भेज दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने मामले का शीघ्र निपटारा करने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार को श्रीरामपुर के माहेश में तृणमूल कांग्रेस की ओर से जुलूस और उसके बाद सभा प्रस्तावित थी। सभा में पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी के शामिल होने की बात थी। विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी के प्रदर्शन के बाद यह उनके जिले में प्रस्तावित पहली बड़ी राजनीतिक सभा मानी जा रही थी।
जुलूस और सभा की अनुमति को लेकर विवाद
माहेश इलाके में जुलूस और सभा के लिए पुलिस की अनुमति लेने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने जुलूस की अनुमति नहीं दी, लेकिन माहेश के स्नानपिंड़ी मैदान में लगभग 2,000 लोगों की सभा आयोजित करने की अनुमति दी थी।
एकल पीठ ने सभा के दौरान धार्मिक रूप से उकसाने वाले भाषणों पर रोक, ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों के पालन और अन्य शर्तों का भी उल्लेख किया था।
मंदिर प्रबंधन ने जताई आपत्ति
माहेश जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन की ओर से भी मैदान में राजनीतिक सभा आयोजित करने पर आपत्ति जताई गई। राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में कहा कि स्नानपिंड़ी मैदान निजी धार्मिक संपत्ति है और वहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
राज्य का तर्क था कि सरकार को सभा आयोजित करने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि भूमि निजी धार्मिक संस्था के अधीन है और मंदिर प्रबंधन अनुमति नहीं देता, तो प्रशासन सभा की अनुमति कैसे दे सकता है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में पहुंचा मामला
एकल पीठ के आदेश के बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को ही उसे चुनौती देते हुए मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ का रुख किया। मंदिर प्रबंधन की ओर से भी मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई।
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एकल पीठ के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके बाद शुक्रवार को मामला फिर मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष आया।
मैदान के अधिकार और अनुमति पर फिर होगी सुनवाई
शुक्रवार की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामला फिर से एकल पीठ को भेजा जा रहा है। एकल पीठ मैदान के प्रबंधन या अधिकार रखने वाले पक्ष की ओर से दायर आवेदन पर विचार करेगी और उसके बाद सभा की अनुमति के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
इस आदेश के बाद माहेश में प्रस्तावित सभा को लेकर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अदालत के अगले आदेश पर ही कार्यक्रम की अनुमति और आयोजन का रास्ता साफ होगा।
कल्याण बनर्जी ने लगाए राजनीतिक आरोप
तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि मंदिर को मुद्दा बनाकर राजनीतिक रूप से सभा को रोकने और धन उगाही की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और मामले में मंदिर प्रबंधन तथा राज्य सरकार के पक्ष अदालत की कार्यवाही में अलग-अलग दर्ज हैं।
फिलहाल श्रीरामपुर की प्रस्तावित सभा का आयोजन कानूनी निर्णय पर निर्भर है। हाई कोर्ट की एकल पीठ मामले का शीघ्र निपटारा करेगी।
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