नई दिल्ली। दिल्ली के सुरजीत भवन आई.टी.ओ में 4 जनवरी को अम्बेडकर महिला मंच द्वारा सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय “दलित महिला शिक्षा में सावित्रीबाई फुले का संघर्ष, योगदान और उपलब्धियाँ” रहा।
सुबह 11.30 बजे से शाम 4.30 बजे तक चले इस कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक न्याय और दलित महिला अधिकारों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. गीता सहारे, प्रख्यात शिक्षाविद, ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को केवल ज्ञान नहीं बल्कि सामाजिक मुक्ति का औजार बनाया। उन्होंने कहा कि आज भी दलित महिलाओं की शिक्षा सबसे बड़ा सामाजिक प्रश्न है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए लेखक एवं चिंतक चंद्रभान प्रसाद ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का संघर्ष भारतीय लोकतंत्र के मूल विचारों से जुड़ा है।
विशिष्ट अतिथि आरफा खानम शेरवानी ने सावित्रीबाई फुले को पितृसत्ता और जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष की प्रतीक बताया।
डॉ. रतनलाल ने शिक्षा और सामाजिक चेतना के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला।
जबकि डॉ. सुभाष चन्द्र ने दलित महिला शिक्षा की संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित किया। एडवोकेट रूबी ने संवैधानिक अधिकारों और दलित महिलाओं की न्याय तक पहुँच पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन संस्था की अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्यकार व सामाजिक नेत्री अनिता भारती ने किया। शालिनी ने प्रस्ताव रखा तथा अनुराधा चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर प्रथम सावित्रीबाई फुले अवार्ड चित्रकार मालविका राज को प्रदान किया गया। प्रत्यक्ष कयाला की गीत प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही।
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