कोलकाता हिन्दी न्यूज | 31 जुलाई 2026: बड़ी पुरानी कहावत है, ‘जहां चाह वहां राह’। यह लाइनें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली एथलीट सीमा कालीरमन पर फिट बैठती हैं।
चार साल के बेटे की जिम्मेदारी, पीएचडी की पढ़ाई के साथ खेल के प्रति ऐसा जुनून उन्हें बाकी एथलीटों से अलग बनाता है। सीमा का सबसे बड़ा सहारा पति रविंदर भी बने, जिनकी कोचिंग में वह देश का नाम रोशन करने में कामयाब हो सकीं।
चुनौतियों से भरा सफर
सीमा का ब्रॉन्ज मेडल जीतने तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा। चोट, प्रेग्नेंसी और तमाम तरह की चुनौतियों के बावजूद सीमा ने कभी अपना हौसला कम नहीं होने दिया। जब-जब जिंदगी ने खेल को उनसे दूर करने की कोशिश की तो सीमा ने हर बार शानदार वापसी की।
डिस्कस थ्रो के फाइनल में 27 साल की इस एथलीट के छह राउंड में से केवल दो ही थ्रो सही (वैलिड) हो पाए, क्योंकि बार-बार डिस्कस साइड नेटिंग में फंस जा रहा था। यह पोडियम सीमा के लिए पहला बड़ा इंटरनेशनल मेडल रहा। सीमा एक पीएचडी स्कॉलर भी हैं और चार साल के बेटे रुद्र की मां हैं।
मां बनने के बाद शानदार वापसी
मां बनने के साथ-साथ सीमा एक टॉप एथलीट के तौर पर भी आगे बढ़ीं। 2022 में बेटे रुद्र के जन्म से पहले उनका पर्सनल बेस्ट 48.08 मीटर था। 2024 में 11 महीने के ब्रेक के बाद उन्होंने प्रतिस्पर्धी डिस्कस थ्रो में वापसी की और अपने पर्सनल बेस्ट को बेहतर करते हुए 57.19 मीटर तक पहुंचाया।
इसके बाद इस साल की शुरुआत में भुवनेश्वर में हुई इंडियन चैंपियनशिप में उन्होंने 59.73 मीटर का थ्रो किया।
पति की कोचिंग और पढ़ाई
सीमा को उनके पति रविंदर कालीरमन कोचिंग देते हैं। रविंदर खुद भारत के जाने-माने डिस्कस थ्रो एथलीट रहे हैं और उन्होंने भारतीय अंडर-18 और अंडर-20 चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीते थे।
सीमा अपने स्पोर्ट्स करियर के साथ-साथ चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी (सीबीएलयू), भिवानी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं।
चोट से वापसी और उपलब्धियां
उनके एथलेटिक करियर को तब बड़ा झटका लगा था, जब घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें तीन साल से ज्यादा समय तक खेल से दूर रहना पड़ा। कड़ी मेहनत और लगन से सीमा ने कॉम्पिटिशन में सफल वापसी की और देश के टॉप डिस्कस थ्रोअर्स में अपनी जगह फिर से बनाई।
उन्होंने 2025 नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता और बाद में नेशनल टाइटल भी अपने नाम किया। उनकी वापसी की खास बात साउथ एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में गोल्ड मेडल जीतना और नेशनल सर्किट पर लगातार शानदार प्रदर्शन करना रही।
2026 में सीमा ने 59.73 मीटर का अपना अब तक का सबसे अच्छा थ्रो किया और 2026 एशियाई खेलों के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स टीम में भी जगह बनाई।
निष्कर्ष: सीमा कालीरमन की कहानी साबित करती है कि सही जुनून और परिवार के सहयोग से हर चुनौती पार की जा सकती है। मां, शोधार्थी और अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट के रूप में उनका सफर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
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